सात वर्ष पहले राजौरी में पाक से गोलाबारी में दो गोलियां लगीं, सेवानिवृत्ति के बाद तैयार कर रहे बॉक्सरों की फौज, इनके क्लब को मिला…

^2003 में सेना में भर्ती हुआ। 2004 में सेना की तरफ से बॉक्सिंग का प्रशिक्षण लिया। फिर अपनी रेजीमेंट 7th लाइट केवलरी की और खेलते हुए मैंने 2 गोल्ड जीते। 2018 में राजौरी के नौशेरा में पोस्ट पर ऑपरेशन रक्षक के दौरान पाक की तरफ से गोलीबारी में मुझे 2 गोलियां लगीं। मेरा उपचार ऊधमपुर में हुआ। 2020 में सिपाही पद से सेवानिवृत्त हुआ। एक सैनिक कभी भी रिटायर नहीं होता। इसलिए मैंने बच्चों को निशुल्क बॉक्सिंग की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया। इस प्रेरक यात्रा की शुरुआत वर्ष 2020 में हुई। सप्ताह में सिर्फ एक दिन, सेल्फ डिफेंस के रूप में बेटियों को ट्रेनिंग दी जाने लगी। न कोई आधुनिक सुविधा थी, न मैदान। बस जज्बा और भरोसा था। गांव के प्रिंसीपल राजेंद्र मारवाल व युवा पवन, नरेश, सुनील और पंकज ने मेरा साथ दिया। पहले ही साल बबीता और कृष्णा ने सब जूनियर प्रतियोगिता (जोधपुर) में हिस्सा लिया और एक गोल्ड व एक ब्रॉन्ज जीता। शुरुआत में अभ्यास के लिए जनसहयोग से सिर्फ एक कच्चा बॉक्सिंग रिंग बनाया। धीरे-धीरे लोगों का भरोसा बढ़ा। उस समय तत्कालीन विधायक गुरदीप शाहपीनी के सहयोग से पक्का बॉक्सिंग रिंग बना और अब विधायक अभिमन्यु पूनिया ने बॉक्सिंग रिंग पर शेड बनवाया। बीते 5 वर्षों में इस टीम ने कई उतार-चढ़ाव देखे। 14 फरवरी 2024 को जब मैंने श्रीगंगानगर में अध्यापक पद पर ज्वॉइन किया, तब मन में सबसे बड़ी चिंता यही थी कि बेटियों की ट्रेनिंग कहीं रुक न जाए। लेकिन बेटियों की निरंतर मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास ने इस डर को ताकत में बदल दिया। अब मेरी नेशनल बॉक्सरों बेटियां राधे गर्ल्स बॉक्सिंग क्लब संभालती हैं। – सुभाष कड़वासरा परमगीत शर्मा| श्रीगंगानगर यह कहानी है सेवानिवृत्त फौजी सुभाष की। सुभाष पहले सेना में फौजी थे। वहां बॉक्सिंग करते थे। सेवानिवृत्ति के बाद अपने गांव किशनपुरा उतराधा को ही कार्यक्षेत्र बना लिया। गांव में युवाओं को नशे से बचाने और खेलों से जोड़ने के लिए निशुल्क बॉक्सिंग प्रशिक्षण की शुरुआत की। क्लब को नाम दिया राधे गर्ल्स बॉक्सिंग क्लब। यह देश का पहला ऐसा बॉक्सिंग क्लब बना, जिसे भारतीय सेना अध्यक्ष द्वारा सीओएएस (चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह कहानी बताती है कि सच्ची देश सेवा सीमा पर ही नहीं, समाज निर्माण में भी होती है। निशुल्क प्रशिक्षण देने के दौरान सुभाष ने अपनी तैयारी भी जारी रखी और शिक्षक बने। वर्तमान में चक 1 एलएलपी में सेवारत हैं। 24 जून 2025 को नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक, सेना मुख्यालय में भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कोच सुभाष कड़वासरा को सीओएएस (चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) अवॉर्ड से सम्मानित किया। इसके साथ ही राधे गर्ल्स बॉक्सिंग क्लब देश का पहला व एकमात्र सीओएएस अवॉर्ड प्राप्त करने वाला बॉक्सिंग क्लब बन गया। यह अवॉर्ड भारतीय सेना का प्रतिष्ठित सम्मान है जो चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ द्वारा सेवानिवृत्त सैनिकों और अधिकारियों को उत्कृष्ट सेवा, साहस, नवाचार और विशेष योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। राधे गर्ल्स बॉक्सिंग क्लब की बेटियां लगातार 66वीं और 67वीं जिला बॉक्सिंग चैम्पियन रह चुकी हैं। राज्य स्तरीय स्कूली बॉक्सिंग में उन्होंने 6 गोल्ड, 1 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज, जबकि फेडरेशन बॉक्सिंग में 3 गोल्ड, 1 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। बॉक्सर कृष्णा का स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया में चयन हुआ। इन गोल्ड मेडलिस्ट बेटियों- बबीता, खुशबू और परमजोत कौर ने अपने गांव के ही बॉक्सिंग रिंग पर तैयारी कर यह मुकाम हासिल किया। वर्ष 2024 में 2 गोल्ड, 1 ब्रॉन्ज और 2025 में फिर 2 गोल्ड व एक रजत जीते।

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