सोशल मीडिया से दूरी, ब्रेक लेकर पढ़ाई ज्योति की स्कूली शिक्षा राजकिशोर उच्च विद्यालय, मक्का से हुई। वीमेंस कॉलेज, रांची से जूलॉजी में स्नातक और रांची विवि से स्नातकोत्तर पूरी की। तैयारी के दौरान ज्योति सोशल मीडिया से दूरी बनाए रहीं, लेकिन यू-ट्यूब के जरिए पढ़ाई करती थीं। जब मन भारी हो जाता तो दोस्तों के साथ रांची के किसी हिस्से में घूमने निकल जाती थीं और उस दिन बिल्कुल पढ़ाई नहीं करती थीं। इससे मानसिक रूप से रिचार्ज होकर फिर नए जोश के साथ पढ़ाई में जुट जाती थीं। इससे पढ़ाई में मन भी लगता था और ऊबती नहीं थी। पिता नहीं हैं, मां और भाइयों ने पढ़ाया चार भाई-बहनों में ज्योति सबसे छोटी हैं। बचपन में ही पिता योगेंद्र साहु का निधन हो गया था। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी मां जयश्री देवी पर आ गई, जिन्होंने आंगनबाड़ी में सहिया के रूप में काम करते हुए बच्चों का पालन-पोषण किया। बाद में दो बड़े भाइयों ने छोटा-मोटा व्यवसाय शुरू कर परिवार की जिम्मेदारी संभाली। ज्योति कहती हैं, ‘यह उपलब्धि मुझसे ज्यादा मेरी मां और मेरे परिवार की है। शुरू से ही भाई- बहनों ने मुझे सपोर्ट किया, तभी मैं यहां तक पहुंच पाई। जब आप बड़ा लक्ष्य पाना चाहते हैं तो परिवार का सपोर्ट बहुत जरूरी होता है। युवाओं के लिए सीख सफलता का संदेश: लक्ष्य को ध्यान में रख कर ईमानदारी से मेहनत करें। पहले प्रयास में असफलता मिले भी तो अनुभव देकर जाती है। जिससे गलतियां सुधार कर आगे बढ़ने का रास्ता मिलता है। ज्योति युवाओं से कहती हैं- अच्छे दोस्त बनाइए जो मुश्किल समय में आपका साथ दें। परिवार के साथ रिश्ते मजबूत रखें, ताकि वे आप पर भरोसा कर सकें और आपको सपोर्ट करें। लगातार बिना ब्रेक पढ़ाई करने से प्रोडक्टिव नहीं बन पाएंगे। ब्रेक लें, पढ़ाई को बोझ की तरह न लें। बुढ़मू प्रखंड के मक्का गांव की ज्योति कुमारी ने सीडीपीओ बनकर अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया है। ज्योति को 32वां स्थान मिला है। साल 2021 में उन्होंने बिना विशेष तैयारी के जेपीएससी परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद रांची में कोचिंग ज्वाइन कर सिलेबस को गहराई से समझते हुए पढ़ाई शुरू की। मेंस परीक्षा के बाद दो महीने तक रोज 12 से 14 घंटे पढ़ाई की। ज्योति की यह सफलता संघर्ष, धैर्य और परिवार के मजबूत सहारे की कहानी बयां करती है।


