कंदाड़ी पंचायत के स्कूलों में शनिवार को नहीं जाते ​हैं शिक्षक, बच्चे मायूस लौट रहे

मनकु नेताम | संगम कोटरी नदी उस पार बसे कोयलीबेड़ा विकासखंड के ग्राम पंचायत कंदाड़ी में तीन प्राथमिक शालाएं हैं। एक कंदाड़ी में तो शेष दो आश्रित ग्राम हिदूर और आमाटोला में है। तीनों स्कूलों में नियमित शिक्षकों के अलावा एक एक अतिथि शिक्षक भी पदस्थ है। शनिवार को तीनों स्कूलों में नियमित शिक्षक पहुंचते ही नहीं हैं। कंदाड़ी और हिदूर में तो अतिथि शिक्षक तक नहीं पहुंचते। यही कारण है यहां की स्कूलें सप्ताह में केवल पांच ही दिन लगती है। शनिवार को यहां एक प्रकार से अघोषित अवकाश होता है। जिले के अंदरूनी गांव से नक्सलवाद तो खत्म होता जा रहा है लेकिन अव्यवस्थाएं दूर नहीं हो पा रही है। कंदाड़ी ग्राम पंचायत में तीन प्राथमिक शालाओं के अलावा एक मिडिल स्कूल भी है। यहां भी शनिवार को प्राय: शिक्षक स्कूल नहीं आते। मामले की कराई जाएगी जांच: एसडीएम पखांजूर टीआर देवांगन ने कहा कि शनिवार को स्कूलों में शिक्षकों के नहीं पहुंचने की जानकारी आपसे मिली है। मामले की बीईओ से जांच कराई जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। सुबह 9.30 बजे प्राथमिक शाला आमाटोला पहुंचे। यहां दर्ज संख्या में 7 है लेकिन स्कूल 5 छात्र ही पहुंचे थे। अतिथि शिक्षक यहां पहुंचे थे लेकिन नियमित शिक्षक नहीं पहुंचे थे। मध्याह्न भोजन यहां एक सप्ताह से नहीं बन पा रहा है। अतिथि शिक्षक लक्ष्मण मंडावी ने कहा कि मध्यांह भोजन के लिए आबंटन नहीं मिल पाया है। गांव के दसरू मंडावी, अगरसाय कुजूर ने बताया कि शनिवार को शिक्षक स्कूल आते ही नहीं हैं। शनिवार सुबह 10 बजे हिदूर प्राथमिक शाला पहुंचे तो यहां स्कूल में ताला लगा मिला। यहां पदस्थ नियमित और अतिथि दोनों शिक्षक नहीं पहुंचे थे। स्कूल में कोई छात्र भी नहीं था। यहां तक मध्याह्न भोजन बनाने वाले तक यहां कोई नहीं पहुंचे थे। गांव के पोरन नुरूटी, बारसू ने बताया कि हर शनिवार को स्कूल का ताला खुलता ही नहीं है। शिक्षकों की लापरवाही का खामियाजा आदिवासी बच्चों को उठाना पड़ रहा है। शनिवार सुबह 9 बजे भास्कर कंदाड़ी प्राथमिक शाला पहुंचा तो यहां पदस्थ तीनों नियमित शिक्षक और एक अतिथि स्कूल नहीं थे। केवल यहां 7 छात्र खेलते मिले। मध्यांह भोजन नहीं बना था। गांव के गज्जू पद्दा, रैनू कचलाम ने बताया शनिवार को तो कभी यहां पढ़ाने शिक्षक नहीं आते हैं।

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