विराट हिन्दू सम्मेलन में महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी महाराज ने हिन्दू समाज को एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हर हिन्दू को घर से निकलने से पहले तिलक अवश्य लगाना चाहिए और सप्ताह या माह में कम से कम एक बार सामूहिक भजन और भोजन कर सामाजिक समरसता को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंगत की संगत ही सामाजिक समरसता का आधार है। बांग्लादेश में हिन्दू समाज पर हो रहे हमलों पर चिंता जताई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि न्यूज एंकर रुबिका लियाकत ने कहा कि मातृ शक्ति ही परिवार और संस्कारों का आधार है। सनातन संस्कृति और सामाजिक एकता के संदेश के साथ रविवार को बड़गांव पंचायत समिति मैदान(उदयपुर) में विराट हिन्दू सम्मेलन आयोजित हुआ। सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। भारतीय सनातन संस्कृति और इतिहास का सम्मान करना है संघ का उद्देश्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भारतीय गो सेवा प्रमुख अजित महापात्र ने कहा कि संघ का उद्देश्य भारतीय सनातन संस्कृति और इतिहास का सम्मान करना है। सभा में पंच परिवर्तन विषय पर चर्चा हुई। मीना सिंघवी, कल्पना प्रजापत, डॉ. कामिनी सुथार शर्मा, वैशाली गमेती और लविश श्रीमाली ने अपने विचार रखे। महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर किया मंगल गान बड़गांव में 2,500 महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर मंगल गान किया। बालकेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होकर शोभायात्रा पंचायत समिति मैदान तक गई। इस दौरान भगवान श्रीराम, कृष्ण, महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी के जयकारे गूंजे। आयोजन समिति के संयोजक डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष की कठिन किंतु परिणामकारी यात्रा ने देश में स्व का भाव और स्वदेशी का भाव जागृत किया है। उत्तम स्वामी महाराज का स्वागत आयोजन समिति के अध्यक्ष ओमशंकर श्रीमाली के नेतृत्व में वेलाराम गमेती चोसरदास, जयंत कोठारी और नरेन्द्र ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत में पंच परिवर्तन विषय पर विषय प्रवर्तन किया गया। इस क्रम में मीना सिंघवी ने कुटुम्ब प्रबोधन पर अपने विचार रखे। कल्पना प्रजापत ने स्वतत्व के जागरण पर प्रकाश डाला। डॉ. कामिनी सुथार शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया। वैशाली गमेती ने नागरिक शिष्टाचार पर विचार व्यक्त किए, जबकि लविश श्रीमाली ने सामाजिक समरसता विषय पर अपना वक्तव्य रखा। हिन्दू सम्मेलन के तहत शोभायात्रा निकाली गई यहां हिन्दू सम्मेलन के तहत शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में मातृ शक्ति ने सिर पर कलश धारण किए मंगलाचार के साथ आगे बढ़ रही थी। शोभायात्रा में भगवान श्रीराम, योगेश्वर कृष्ण, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी के जयकारे लगाते चले। मेवाड़ के आराध्य एकलिंगनाथ, चारभुजानाथ के जयकारों से भी गगन गूंजा। शोभायात्रा के अग्रभाग में मंगल धुन बजाते बैंड और मेवाड़ी गीत और भजन गाते कलाकार चले। इसके बाद में निशान के रूप में दो घोड़े और दो सजे-धजे ऊंट शोभायात्रा की शोभा बने। इनके पीछे घोड़े पर सवार झांसी की रानी की झांकी आकर्षण का केंद्र रही।


