मनरेगा का नाम बदलने को लेकर सियासत तेज हो गई है। एक ओर जहां कांग्रेस द्वारा गांवों में पहुंचकर योजना में किए गए बदलाव को जनविरोधी बता रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर अब भाजपा ने भी योजना के फायदे गिनाना शुरू कर दिया है। सोमवार को भाजपा प्रदेश मंत्री पिंकेश पोरवाल, जिला प्रभारी सोमकांत शर्मा और जिलाध्यक्ष लक्ष्मी रेला ने वीबी जीरामजी के फायदे गिनाए। पोरवाल ने कहा कि मनरेगा का नाम विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) को लेकर कांग्रेस जनता के बीच भ्रम फैला रही है। कांग्रेस शासन में मनरेगा में भ्रष्टाचार, फर्जी जॉब कार्ड आदि का पर्याय बन गया था। अब वीबी जीरामजी अधिनियम से ग्रामीण रोजगार की तस्वीर बदलेगी। नए कानून में सालाना रोजगार की गारंटी 100 से बढाकर 125 दिन कर दी गई है और गांव में ठोस व टिकाऊ काम होंगे। उन्होंने कहा कि मनरेगा बंद नहीं हुआ है, इसका नाम बदलकर वीबी जीरामजी रखा गया है। कांग्रेस को राम जी के नाम से ही करंट लगता है। अब गांव में ईमानदारी से काम होंगे। करीब एक हजार करोड़ का बजट ग्राम चौपाल के माध्यम से खर्च किया जाएगा। यह कानून ग्रामीण रोजगार नीति को विकसित भारत के रोडमैप से जोड़ेगा। नए कानून में जियो टैगिंग, सैटलाइट इमेजरी, मोबाइल एप और एआई से निगरानी होगी। गरीब को सम्मान के साथ मिलेगा रोजगार जिला प्रभारी सोमकांत शर्मा ने कहा यूपीए के समय की मनरेगा भ्रष्टाचार, कुशासन, खराब संपत्ति सृजन एवं न्यूनतम दीर्घकालिक प्रभाव से ग्रसित था। इन संरचनात्मक विफलताओं को पहचानते हुए एनडीए सरकार ने मनरेगा की जगह ग्रामीण रोजगार को नई परिभाषा देते हुए कानून लागू किया है। इसके तहत ग्रामीण आत्मनिर्भरता, रोजगार और आजीविका को मजबूत करते हुए हर गरीब को सम्मान के साथ रोजगार देता है। इस दौरान जिला संयोजक हरकेश मटलाना, सह संयोजक अभिषेक शर्मा, विजय बैरवा, जिला महामंत्री विपिन जैन, मीडिया प्रभारी प्रेम हरितवाल, मंजू लता जाटव, सरोज मीणा, सोमेश विजय, राजेश तिवारी, हरिओम हरसाना, राजेंद्र छीपा, किशोरी लाल बैरवा सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।


