भास्कर न्यूज|गुमला/डुमरी जिले का एक मात्र आकांक्षी प्रखंड की श्रेणी में चयनित डुमरी प्रखंड के लोगों को समुचित स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पुराने भवन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। दूसरी ओर डुमरी प्रखंड मुख्यालय में 30 शैय्या वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का निर्माण पांच वर्षों से अधर में लटका हुआ है। 10.17 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुई। जिले के 3 उपायुक्तों ने कार्य स्थल का निरीक्षण किया। लेकिन उनका तबादला हो गया और अस्पताल का निर्माण कार्य ठप पड़ा रह गया। स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर सिर्फ भवन का ढांचा है, पुराने भवन में संचालित स्वास्थ्य केंद्र में कमरों के आभाव में संसाधन पर्याप्त मात्रा में नहीं है। ऐसे में प्रखंड के लोग बेहाल हैं। प्रखंड के हजारों लोग आज भी बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं से वंचित हैं। सरकार जहां स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की बात करती है। वहीं इस अस्पताल की स्थिति सरकार के दावों की पोल खोल रही है। स्थानीय लोगों को इलाज के लिए गुमला या रांची रेफर कर दिया जाता है, जिससे मरीजों को आर्थिक और शारीरिक रूप से भारी परेशानी उठानी पड़ती है। विभाग ने निर्माण काम संवेदक आरबी कॉन, रांची को सौंपा गया था, लेकिन उसने 2 साल पहले ही अधूरा छोड़ दिया। विभाग ने संवेदक को टर्मिनेट तो कर दिया, लेकिन निर्माण कार्य पूरा कराने की कोई ठोस पहल अब तक नहीं की गई। इधर, भवन में लगाए गए लोहे के सरिए जंग खा चुके हैं, दीवारें दरकने लगी हैं और यह जगह असामाजिक तत्वों व नशेड़ियों का अड्डा बन चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 5 साल में अस्पताल का काम पूरा न होना सरकार की विफलता को दर्शाता है। हर छोटे-बड़े इलाज के लिए मरीजों को गुमला या रांची रेफर कर दिया जाता है, जिससे गरीबों को भारी परेशानी होती है। अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकार इस अधूरे अस्पताल के निर्माण को जल्द पूरा कराकर डुमरी के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराएगी, या फिर यह प्रोजेक्ट यूं ही सरकारी फाइलों में धूल फांकता रहेगा ? कार्यपालक अभियंता, भवन निर्माण विभाग विभाग महाराणा प्रताप सिंह ने बताया कि संवेदक को टर्मिनेट कर दिया गया है। पुर्ननिविदा की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है। शीघ्र ही निविदा निकाली जाएगी।


