इंदौर पुलिस अब अपराधों की जांच तेजी से कर सकेगी। इंदौर के चार जोन को केंद्र सरकार द्वारा चार फोरेंसिक वाहन आवंटित किए गए हैं। इन फोरेंसिक वैन की मदद से घटनास्थल पर ही अपराध की जांच हो सकेगी। हत्या, ज्यादती, लूट और एक्सीडेंट जैसे संगीन अपराधों में सबूत किसी थाने में नहीं, बल्कि सीधे घटनास्थल पर ही सुरक्षित किए जाएंगे। सबूतों की मौके पर ही जांच हो जाएगी। पुलिस विभाग की इस पहल का मुख्य उद्देश्य फोरेंसिक आधारित जांच को तेजी से लाना है। इससे न केवल अपराधों का जल्द खुलासा होगा, बल्कि अपराधियों को सजा दिलाने की दर में भी सुधार होगा। माइक्रोस्कोप, थर्मल प्रिंटर भी
ये वैन आधुनिक फोरेंसिक उपकरणों से लैस हैं, जिससे घटनास्थल पर ही वैज्ञानिक विश्लेषण संभव हो सकेगा। मोबाइल फोरेंसिक वैन में स्टीरियो माइक्रोस्कोप, वेइंग बैलेंस, डीएसएलआर कैमरा, मिनी फ्रिज, एलईडी टीवी स्क्रीन, थर्मल प्रिंटर, बॉडी-वॉर्न कैमरा सहित कई आधुनिक उपकरण मौजूद हैं। दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण
इन नई वैन और उनमें लगे उपकरणों के संचालन के लिए इंदौर के फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) के अधिकारियों और विशेषज्ञों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र यह होगा कि कैसे घटनास्थल पर ही नमूनों की जांच की जाए, ताकि हर साक्ष्य को लैब भेजने की जरूरत न पड़े और समय की बचत हो सके। अपराधियों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटा सकेंगे
रेप, छेड़छाड़ और घरेलू हिंसा जैसे मामलों में अब डीएनए और जैविक साक्ष्य तुरंत सुरक्षित किए जाएंगे, जिससे अपराधी बच नहीं सकेंगे। हिट एंड रन और सड़क हादसों में टायर के निशान, ब्रेक मार्क और खून के सैंपल मौके पर ही दर्ज होंगे, जिससे दोषियों की पहचान आसान हो जाएगी। सबूत नष्ट होने का खतरा रहता था घटनास्थल पर पुलिस के पहुंचने के बाद एफएसएल की टीम को सूचना दी जाती थी। इस दौरान सबूत नष्ट होने का खतरा रहता था। घटनास्थल पर पुलिस से पहले आम लोग पहुंच जाते थे। कोई खून पर पानी डाल देता था या घटनास्थल के आसपास चलने लग जाता था। चोरी के केस में फरियादी द्वारा घर का सामान कितना गया, इसकी चेकिंग में फिंगर प्रिंट मिट जाते थे। फोटो अलग-अलग एंगल से नहीं हो पाते थे। मर्डर जैसे अपराध को जांचने का मकसद रंजिश, लेन-देन का विवाद या तत्कालिक विवाद रहता है। इन्वेस्टिगेशन जल्द करने में फायदा मिलेगा, अपराधी बचेंगे नहीं
इंदौर के चारों जोन को चार फोरेंसिक वैन मिली हैं। इससे घटनास्थल पर सारे साक्ष्य जुटा लिए जाएंगे। इससे इन्वेस्टिगेशन जल्द करने में फायदा मिलेगा।
-कृष्ण लालचंदानी, डीसीपी जोन-1


