प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की नागपुर सब-जोनल यूनिट ने अंतरराज्यीय रेत माफिया के एक बड़े सिंडिकेट का खुलासा किया है। माफिया मप्र के नाम पर फर्जी इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिट परमिट (ई-टीपी) बनाकर महाराष्ट्र के नागपुर और भंडरा जिलों में अवैध खनन कर रहे थे। ईडी ने इस मामले में महाराष्ट्र और मप्र के 16 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। इस नेटवर्क से 30 करोड़ रुपए से ज्यादा की अवैध कमाई होने का अनुमान लगाया जा रहा है। छापेमारी में अवैध नकदी समेत बीएमडब्ल्यू, फॉरच्यूनर और थार जैसी लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की गई हैं। यह छापेमारी भोपाल, नर्मदापुरम, बैतूल जिलों में और महाराष्ट्र के नागपुर व भंडरा जिलों में धनशोघन निवारण अधिनियम के तहत की गई है। ईडी नागपुर के मुताबिक इस पूरे मामले की शुरुआत नागपुर के सदर और अंबाजारी पुलिस थानों में दर्ज एफआईआर से हुई। पुलिस ने नरेंद्र पिंपल, अमोल उर्फ गुड्डू खोरगड़े और अन्य के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। इन पर फर्जी ई-परमिट का इस्तेमाल कर संगठित तरीके से अवैध रेत खनन और परिवहन का आरोप था। पुलिस की इसी जांच को आधार बनाकर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की थी। 6-10 हजार में बिक रहे थे फर्जी ई-टीपी:
मनी लॉन्ड्रिंग जांच में ईडी को पता चला कि संगठित रेत माफिया गिरोह बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन कर रहे थे। अवैध रेत के परिवहन के दौरान जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए उन्होंने जालसाजियां शुरू कर दीं। राहुल खन्ना और बबलू अग्रवाल के नेतृत्व वाला एक गिरोह मप्र में स्थित कानूनी रूप से पट्टे पर लिए गए रेत घाटों के नाम पर फर्जी और मनगढ़ंत ई-टीपी तैयार कर रहा था। ये नकली ई-टीपी नागपुर में रेत माफिया सरगनाओं को 6,000 रुपए से 10 हजार रुपए प्रति ई-टीपी की दर से बेचे गए थे। इन फर्जी ई-टीपी के इस्तेमाल से रेत माफिया नागपुर और आसपास के क्षेत्रों में स्थित रेत घाटों से अवैध रूप से खोदी गई रेत का परिवहन करते थे। महाराष्ट्र के बंद रेत घाटों से हो रहा अवैध रेत खनन
नागपुर के आसपास के रेत घाट बंद होने के बाद भी रेत माफिया लोगों की मिलीभगत से रेत घाटों से अवैध रूप से रेत का खनन कर रहे थे। मप्र से फर्जी रॉयल्टी ले रहे थे। इन रॉयल्टी का इस्तेमाल वे अवैध रेत बेचने के लिए कर रहे थे। आरोपियों के खिलाफ कई मामले दर्ज किए हैं।


