नगर निगम तीन दिन से लगातार अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कर रहा है। 50 से ज्यादा कर्मचारी और अधिकारी की टीम ने शनिवार को न्यू मार्केट के बाद रविवार को पुराने भोपाल और सोमवार को अशोका गार्डन और रायसेन रोड पर बड़ी कार्रवाई की। सोमवार को टीम ने 13 ट्रक से ज्यादा माल जब्त किया, लेकिन इसके बाद भी अतिक्रमण दोबारा से जम जाते हैं। इसका मुख्य कारण हॉकर्स को लेकर शहर में न तो कोई योजना है और न ही सख्त नियम। शहर में अब तो सड़क तक पर हॉकर्स के कब्जे हो गए हैं। इन सब पर निगम ने बीते साल 5 करोड़ रुपए खर्च कर 62 हजार से ज्यादा अतिक्रमण हटाए और उसे समझौता शुल्क से मिले सिर्फ 12 लाख रुपए। यानी हर दिन अतिक्रमण हटाने के लिए निगम 1.36 लाख रुपए खर्च किए, जबकि समझौता करने पर उसे महज 3 हजार रुपए हर दिन मिले। इस साल अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के लिए 6 करोड़ रुपए का बजट रखा है। जब्त सामान को 10 दिन में छोड़ देता है निगम
नगर निगम ने बीते साल अवैध भवनों को हटाने से लेकर अतिक्रमण के खिलाफ कुल 103 बड़ी कार्रवाई की थीं। यानी हर तीसरे दिन निगम अमले ने पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर कार्रवाई की थी। निगम अभी सिर्फ ट्रैफिक में बाधक बनने के नाम पर कार्रवाई करता है। निगम की टीम द्वारा मौके से जब्त सामान को 10 दिन में शुल्क जमा कर छोड़ दिया जाताहै। हालांकि तब तक हॉकर्स दूसरी व्यवस्था कर दुकान लगा लेते हैं। अतिक्रमण के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। दोबारा अतिक्रमण होने की शिकायत पर फिर कार्रवाई करते हैं। लोग रोजगार भी करते रहें और अतिक्रमण भी न हो इसके लिए काम कर रहे हैं। हॉकर्स को लेकर योजना बनाने पर भी काम कर रहे हैं। -संस्कृति जैन, कमिश्नर नगर निगम समाधान- बड़े शहरों का मॉडल अपना सकते हैं
देश के बड़े शहरों में हॉकर्स के लिए सख्त नीति लागू है। बिना रजिस्ट्रेशन व्यापार की अनुमति नहीं मिलती। निगम शर्तों के साथ तय जगह देता है और तय सीमा से बाहर फैलाव पर रोक है। व्यापार खत्म होने के बाद पूरा सामान साथ ले जाना अनिवार्य है। भोपाल में हॉकर्स फुटपाथ पर ठेले, टेबल और कुर्सियां छोड़ देते हैं।


