राज्य सरकार द्वारा बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे ज़मीनी हकीकत में खोखले साबित हो रहे हैं। अलवर जिला अस्पताल में बीपी और शुगर जांच की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। मशीनों में बार-बार एरर आने और खराब रहने के कारण सैकड़ों मरीज रोज़ाना बिना जांच के लौटने को मजबूर हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी नंबर 8, जहां बीपी और शुगर की जांच होती है, वहां हालात बेहद चिंताजनक हैं। मशीनें बार-बार बंद हो जाती हैं, जिससे नर्सिंगकर्मी जांच करने में असमर्थ हैं। मरीजों को लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है और कई बार एक घंटे इंतज़ार के बाद भी जांच नहीं हो पाती। देखे PHOTOS सबसे गंभीर बात यह है कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले करीब एक साल से लगातार बनी हुई है, इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन और संबंधित विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। स्टोर से बार-बार लोकल और घटिया क्वालिटी के उपकरण भेजे जा रहे हैं, जो कुछ ही दिनों में खराब हो जाते हैं। ओपीडी के नर्सिंगकर्मी लक्ष्मीनाथ शर्मा ने बताया कि रोजाना 300 से 400 मरीज जांच के लिए आते हैं, लेकिन अव्यवस्था के कारण मरीजों और स्टाफ दोनों को मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है। मरीजों का गुस्सा स्टाफ पर निकलता है, जबकि असल जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की बनती है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर समस्या की जानकारी नोडल अधिकारी, पीएमओ और स्टोर विभाग तक कई बार पहुंचाई जा चुकी है, लेकिन उसके बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं किया गया। मरीजों का आरोप है कि जिला अस्पताल जैसे बड़े संस्थान में भी बुनियादी जांच सुविधा का यह हाल है, तो आम जनता बेहतर इलाज की उम्मीद किससे करे। जांच कराने आए पंकज ने बताया की पिछले एक घंटे से यहां लाइन में खड़ा हू लेकिन नंबर ही नहीं आता अंदर स्टाफ के पास मशीन ही सही नही है।


