डाबी (बूंदी) के रावणा राजपूत समाज ने मृत्युभोज और ‘बर्तन लेन-देन’ जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह पहल समाज में फिजूलखर्ची रोकने और आर्थिक बोझ कम करने के उद्देश्य से की गई है। रावणा राजपूत समाज के बूंदी जिला अध्यक्ष शंभु सिंह सोलंकी ने बताया कि इस सुधार की शुरुआत उनके परिवार से हुई। हाल ही में उनके चाचा स्वर्गीय जगदीश सिंह सोलंकी की पत्नी नंदकंवर के निधन के बाद परिवार ने ‘धोवरा फेरहवानी’ (बर्तन बांटने की रस्म) को बंद करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया। परिवार के सदस्यों रमेश सिंह सोलंकी, सुरेश सिंह और प्रकाश सिंह ने इस पहल का समर्थन किया। इसी के साथ समाज में आर्थिक बोझ माने जाने वाले मृत्युभोज को भी बंद करने की घोषणा की गई। इस सामाजिक सुधार में पुरुषों के साथ-साथ समाज की महिलाओं ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। सुशीला कंवर (बिजोलिया), सायर कंवर और चांद कंवर सहित अन्य महिला सदस्यों ने इस निर्णय का स्वागत किया। उनका मानना है कि ऐसे बदलावों से समाज के मध्यम और गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। इस ऐतिहासिक निर्णय के दौरान समाज के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इनमें डाबी से कालूसिंह, प्रकाश सिंह, भीमराज सिंह; डसालिया से बंशी सिंह, नंगपूरा से भेरू सिंह, पारसोली से मोहन सिंह, बड़ून्न्ददा से महावीर सिंह, बिजोलिया से तेज सिंह और अन्य क्षेत्रों से रामसिंह, महावीर सिंह, दुर्गेश सिंह, विमल सिंह, दीपक सिंह, संजू सिंह, घनश्याम सिंह शामिल थे। बूंदी जिला अध्यक्ष शंभु सिंह सोलंकी ने कहा, “समाज में फैली कुरीतियां आर्थिक और मानसिक दबाव का कारण बनती हैं। हमने अपने परिवार से इसकी शुरुआत की है ताकि आने वाली पीढ़ी को एक प्रगतिशील समाज मिल सके।”


