राजस्थान पुलिस अब अपनी कार्यप्रणाली को पूरी तरह पेपरलेस और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर के आदेश में अब प्रदेश में मेडिकल लीगल केस (MLC) और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट (PMR) तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होने जा रही है। 1 फरवरी-2026 से राज्य के सभी पुलिस स्टेशनों और हॉस्पिटलों में हाथ से लिखी रिपोर्टों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।
ऑनलाइन प्रक्रिया ही होगी मान्य
महानिरीक्षक पुलिस (अपराध) परम ज्योति ने बताया- राजस्थान हाईकोर्ट ने 17 नवंबर-2025 को दिए अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है। भविष्य में सभी प्रकार की MLC और PMR प्रक्रिया केवल MedLEaPR Software और CCTNS के माध्यम से ही संपादित की जाएगी। इस संबंध में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध) और महानिरीक्षक (पुलिस स्टेट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो) को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अधिकारियों की तय होगी जिम्मेदारी
नए नियमों के अनुसार, 1 फरवरी के बाद किसी भी प्रकरण में MLC या PMR रिपोर्ट हाथ से बनाई जाती है। सॉफ्टवेयर का यूज नहीं किया जाता है, तो इसके लिए संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय की गई है। इसके लिए संबंधित थानाधिकारी, अनुसंधान अधिकारी और संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी), जयपुर एवं जोधपुर के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) एवं पुलिस आयुक्त (कमिश्नर) व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माने जाएंगे। CCTNS से सीधे डाउनलोड होंगी रिपोर्ट
पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) की ओर से जारी निर्देशों के तहत अब MLC और PMR के सभी अनुरोध CCTNS के माध्यम से ही जनरेट किए जाएंगे। डॉक्टरों की ओर से तैयार की गई अंतिम रिपोर्ट भी CCTNS के जरिए ही डाउनलोड की जाएगी। इस व्यवस्था से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं में मानवीय हस्तक्षेप और दस्तावेजों में हेरफेर की संभावना भी खत्म हो जाएगी। स्टेट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के महानिरीक्षक अजय पाल लाम्बा ने समस्त जिला पुलिस अधीक्षकों और आयुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्राधिकार में इन आदेशों की कड़ाई से पालना सुनिश्चित करें।


