‘ऑफ सीजन फसलें उगाए तो होगा फायदा’:मत्स्य और पशुपालन भी अपनाएं, नर्सरी तैयार करने के तरीके बताए

राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM) योजना के अंतर्गत उद्यान विकास समिति के अध्यक्ष एवं जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में दो दिवसीय जिला स्तरीय सेमिनार का आयोजन किया गया। जनजाति विकास विभाग के हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले में उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की गई। ऑफ सीजन फसलों से मुनाफा ​सेमीनार के मुख्य अतिथि और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष हकरू भाई मईडा ने किसानों को उद्यानिकी फसलों की खेती के साथ-साथ उनके बेहतर विक्रय के लिए संगठन बनाने की सलाह दी। वहीं, कृषि अनुसंधान संस्थान के संभागीय निदेशक डॉ. हरगिलास मीणा ने जिले में उद्यानिकी फसलों के क्षेत्रफल और उत्पादन के आंकड़े साझा करते हुए उन्नत किस्मों के उपयोग पर जोर दिया। पूर्व प्रधान बलवीर रावत ने अपने संबोधन में ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों के माध्यम से ‘ऑफ सीजन’ फसलें उगाकर अधिक लाभ कमाने के गुर सिखाए। ​विदेशी अनुभवों से मिली सीख कृषक कुरेश भाई ने डेनमार्क यात्रा के अनुभवों को पीपीटी के माध्यम से साझा किया और पशुपालन व डेयरी क्षेत्र में संभावनाओं की जानकारी दी। पंकज बामनिया ने पशुपालन के साथ मत्स्य पालन और मशरूम उत्पादन को अपनाने की सलाह दी। संघर्ष कटारा ने किसानों को सब्जियों और फूलों की खेती के लिए उन्नत नर्सरी तैयार करने के तकनीकी तरीके बताए। ​चुनौतियां और समाधान ​कार्यक्रम के दौरान भारतीय किसान संघ के रणछोड़ जी पाटीदार ने फसलों की बिक्री के लिए मंडी और समर्थन मूल्य की आवश्यकता पर बल दिया। सहायक निदेशक उद्यान बदामीलाल निनामा ने उद्यानिकी फसलों की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा करते हुए किसानों की समस्याओं का समाधान किया। वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक उद्यान जितेंद्र सिंह बारोड़ ने किसानों को उद्यान विभाग की योजनाओं के संबंध में जानकारी प्रदान की। इससे पूर्व उपनिदेशक उद्यान दलसिंह गरासिया ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और सेमिनार के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।

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