अपने ही पांच वर्षीय बेटे और तीन वर्षीय बेटी की निर्मम हत्या करने वाले पिता को न्यायालय ने दोषी करार देते हुए दोहरी आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। खंडवा जिले के पंधाना थाना क्षेत्र के इस जघन्य और चिह्नित प्रकरण में प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उत्सव चतुर्वेदी की अदालत ने आरोपी को कठोर दंड से दंडित किया। न्यायालय ने आरोपी जादू पिता लिमडा (35) निवासी लालमाटी, ग्राम जामली, जिला खंडवा को बालक अरुण उर्फ वरुण और बालिका सुनीता की हत्या के लिए धारा 302 भादवि में अलग-अलग आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी जादू को साक्ष्य छुपाने के मामले में भी दोषी पाया गया हैं। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रकरण का संचालन उप संचालक अभियोजन त्रिलोक चंद्र बिल्लौरे ने किया। ऐसे हुआ था सनसनीखेज खुलासा अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी हरिप्रसाद बांके ने बताया कि 9 मार्च 2023 को फरियादी गोपाल ने थाना पंधाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने बताया कि आरोपी जादू की शादी करीब 7 साल पहले सिंदूर बाई से हुई थी। दोनों के दो बच्चे थे-5 वर्षीय वरुण और 3 वर्षीय सुनीता। घटना से करीब 10-12 दिन पहले पत्नी मायके चली गई थी और दोनों बच्चे आरोपी के पास थे। 5 मार्च 2023 को दोपहर करीब 1.30 बजे आरोपी बाइक से दोनों बच्चों को साथ लेकर ग्राम अंबाखेड़ा जाने की बात कहकर निकला, लेकिन शाम करीब 4 बजे वह अकेला घर लौट आया। परिजनों को लगा कि वह बच्चों को मां के घर छोड़ आया होगा। अगले दिन जब पता चला कि बच्चे अंबाखेड़ा नहीं पहुंचे हैं, तो परिजनों को शंका हुई। आसपास तलाश के बाद भी जब बच्चों का कोई सुराग नहीं मिला तो अज्ञात के खिलाफ गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पूछताछ में उगला खौफनाक सच पुलिस जांच के दौरान जब आरोपी से सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने अपना अपराध कबूल कर लिया। आरोपी ने बताया कि वह दोनों बच्चों को मंदिर में पूजा कराने के बहाने जंगल ले गया और सुनसान जगह पर पत्थर से उनकी छाती पर वार कर हत्या कर दी। इसके बाद दोनों शवों को एक साथ रखकर खाखरे के पत्तों से ढक दिया और बाइक से घर लौट आया। इधर, आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने जंगल से दोनों बच्चों के शव बरामद किए, हत्या में इस्तेमाल किया गया पत्थर जब्त किया गया। घटना के समय पहने गए कपड़े आरोपी ने जला दिए थे, जिनकी राख भी पुलिस ने जब्त की। डीएनए रिपोर्ट से भी घटना की पुष्टि हुई। पुलिस की सख्त कार्रवाई, कोर्ट ने माना अपराध सिद्ध पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर संपूर्ण अनुसंधान के बाद चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान सभी साक्ष्य, गवाह और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला समाज को झकझोर देने वाले इस जघन्य अपराध में न्याय की बड़ी मिसाल माना जा रहा है।


