सड़कों पर दौड़ रहे करीब 7 हजार ईवी, वायु प्रदूषण में आई कमी

भास्कर न्यूज| भरतपुर लोहागढ़ की धरती अब हरित और स्मार्ट परिवहन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों और पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच शहरवासियों का भरोसा अब इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर टिकता नजर आ रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भरतपुर जिले में कुल 6,995 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हो चुके हैं। यह संख्या न केवल शहर में ई-मोबिलिटी की स्वीकार्यता को दर्शाती है, बल्कि भविष्य में प्रदूषण मुक्त परिवहन की मजबूत नींव भी रखती है। भरतपुर में इलेक्ट्रिक वाहनों की रीढ़ ई-रिक्शा बन चुके हैं। शहर की सड़कों पर 2,485 पैसेंजर ई-रिक्शा रोजाना हजारों यात्रियों को सस्ती और सुगम आवाजाही का विकल्प दे रहे हैं। वहीं, 523 ई-रिक्शा कार्ट माल ढुलाई में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनके अलावा 200 इलेक्ट्रिक कारें, 304 थ्री-व्हीलर पैसेंजर, 52 अन्य थ्री-व्हीलर, 2 दुपहिया और 3 भारी इलेक्ट्रिक चौपहिया वाहन भी शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। ई-रिक्शा न सिर्फ रोजगार का साधन बने हैं, बल्कि कम किराये में यात्रा की सुविधा देकर आमजन की पहली पसंद भी बन गए हैं। प्रादेशिक परिवहन अधिकारी इंदू मीणा ने बताया कि भरतपुर में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे न केवल पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम हुई है, बल्कि वायु और ध्वनि प्रदूषण में कमी आई है। शहर में हाइवे और पंपों पर चार्जिंग स्टेशन खोले जाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। {स्टेटिक चार्जिंग स्टेशन, राजेंद्र नगर, {टाटा पावर चार्जिंग स्टेशन, सेवर {एक्सोबोल्ट चार्जिंग स्टेशन, राजेंद्र नगर, {अथर ग्रिड चार्जिंग स्टेशन, बजरंग नगर कॉलोनी {टाटा पावर चार्जिंग स्टेशन, बछामदी {वोल्ट पंडा चार्जिंग स्टेशन, राजेंद्र नगर {स्टेटिक चार्जिंग स्टेशन, कुम्हेर, .इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन, आगरा-जयपुर रोड पर्यावरण और व्यवसाय, दोनों को फायदा:- चार्जिंग स्टेशन व्यवसायियों के लिए आय का नया अवसर बन रहे हैं। चार्जिंग के दौरान उपभोक्ता आसपास की दुकानों और सेवाओं का भी उपयोग करते हैं, जिससे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिल रहा है। सबसे बड़ा लाभ यह है कि ईवी के बढ़ते उपयोग से वायु और ध्वनि प्रदूषण में कमी आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पेट्रोल पंपों और हाईवे पर चार्जिंग स्टेशन बढ़े, तो भरतपुर जल्द ही एक आदर्श ईवी-फ्रेंडली शहर के रूप में पहचान बना सकता है। पेट्रोल और डीजल की तुलना में बिजली काफी सस्ती है, जिससे प्रति किलोमीटर चलने का खर्च बहुत कम हो जाता है। घरों में ईवी चार्जिंग बन सकती है हादसे का बढ़ा खतरा:- परिवहन विभाग के निरीक्षक देवेंद्र सूंडा का कहना है कि घर में चार्जिंग के दौरान बिजली फाल्ट, ओवर हीटिंग या शॉर्ट सर्किट की संभावना रहती है, जिससे आग या अन्य दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। घरों में चार्जिंग करते समय सुरक्षा उपाय अपनाएं और जहां संभव हो, सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन का उपयोग करें। ईवी की बढ़ती संख्या के साथ चार्जिंग सुविधा भी विस्तार ले रही है। फिलहाल शहर में 8 चार्जिंग स्टेशन संचालित हैं। सरकार की नई नीति के तहत अब चार्जिंग स्टेशन खोलने के लिए किसी विशेष लाइसेंस की जरूरत नहीं है। कोई भी व्यक्ति, होटल, मॉल, पेट्रोल पंप संचालक या निजी संस्था यह सुविधा शुरू कर सकती है। इसके लिए अलग कमर्शियल बिजली कनेक्शन, पर्याप्त पार्किंग, फायर सेफ्टी और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा।

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