हाइकोर्ट ने पूछा-टाइगर स्टेट में ही टाइगर सुरक्षित क्यों नहीं?:MP में 54 टाइगर्स की मौत पर मांगा जवाब; याचिका में दावा- नेपाल-चीन में होती है तस्करी

टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में बढ़ती टाइगर्स की मौतों पर जबलपुर हाईकोर्ट ने पूछा है कि टाइगर स्टेट में ही टाइगर सुरक्षित क्यों नहीं हैं। साल 2025 में 54 बाघों की मौतों और शिकार पर एक याचिका दायर की गई है। जिसमें बताया है कि टाइगर के शिकार के बाद नेपाल और चीन में बॉडी पार्ट की तस्करी की जाती है। रातापानी टाइगर रिजर्व में रेलवे ट्रैक पर अंडरब्रिज बनाया जाए। मंगलवार (20 जनवरी) को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) को भी नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 11 फरवरी को होगी। मध्य प्रदेश में हैं 785 टाइगर
जनहित याचिका भोपाल के वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने हाईकोर्ट में दाखिल की है। उन्होंने दावा किया है कि टाइगर स्टेट में वर्ष 2025 के दौरान 54 बाघों की मौत हो गई है। दुनिया भर में बाघों की कुल संख्या 5,421 हैं। जिनमें से 3,167 बाघ भारत में पाए जाते हैं। इनमें भी मध्यप्रदेश में ही 785 टाइगर मौजूद हैं। ऐसे में यह देश का सबसे बड़ा टाइगर हब कहलाता है। एक साल में मौतों का सबसे बड़ा आंकड़ा
याचिका में बताया कि साल 2025 में मध्यप्रदेश में 54 टाइगर्स की मौतें हुई हैं। यह प्रोजेक्ट टाइगर लॉन्च होने के बाद अब तक 1 साल में हुई मौतों का सबसे बड़ा आंकड़ा है। एमपी में साल 2021 में 34, साल 2022 में 43, साल 2023 में 45, साल 2024 में 46 और साल 2025 में सबसे ज्यादा 54 टाइगर्स की मौत हुई है। हाल ही में सिक्किम में एक अंतरराष्ट्रीय तस्कर यांगचेन लखुंगपा को गिरफ्तार किया था। जिससे पूछताछ में खुलासा हुआ है कि भारत में टाइगर्स के शिकार के बाद उनके बॉडी पार्ट्स नेपाल और चीन भेजे जाते हैं। रातापानी में 9 टाइगर्स की मौत का भी मुद्दा
याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट में पेश हुए सीनियर एडवोकेट आदित्य संघी ने कोर्ट में नेशनल पार्कों में हुई बाघों की मौत के साथ-साथ भोपाल के रातापानी टाइगर रिजर्व में रेलवे ट्रैक पर 9 टाइगर्स और 10 लैपर्ड के कटकर मर जाने का मुद्दा भी उठाया है। मांग की है कि रेलवे ट्रैक के नीचे अंडरब्रिज बनाए जाए। सबसे अधिक वार्षिक मौतों का रिकॉर्ड
याचिका में बताया है कि वर्ष 1973 में शुरू हुए प्रोजेक्ट टाइगर के बाद यह पहली बार है, जब किसी एक राज्य में एक ही वर्ष में इतनी बड़ी संख्या में बाघों की मौत दर्ज की गई है। जनवरी 2025 से 19 दिसंबर 2025 के बीच हुई 54 टाइगर मौतें अब तक की सबसे अधिक वार्षिक मौतों का रिकॉर्ड बन चुकी हैं। 16 दिसंबर 2025 को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि 2025 में मध्यप्रदेश में 54 टाइगर की मौतें हुई है। यह प्रोजेक्ट टाइगर के बाद सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट में कहा है कि बाघों की बढ़ती संख्या के दावों के पीछे पोचिंग, करंट लगने, रेल हादसों और रहस्यमयी मौतों की डरावनी हकीकत छिपी हुई है। रेलवे लाइन पर 9 बाघ और 10 तेंदुए मरे
शिकार को देखते हुए खतरे की भयावहता उस समय और उजागर हुई जब वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो और एमपी टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने अंतरराष्ट्रीय तस्कर यांगचेन लखुंगपा को गिरफ्तार किया। आरोपी इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस में वांछित था और उसका तस्करी नेटवर्क भारत, नेपाल, तिब्बत और चीन तक फैला हुआ था। स्थिति की गंभीरता इस बात से भी स्पष्ट होती है कि बुधनी–मिडघाट रेलवे लाइन, जिसे अब ‘डेथ ट्रैक’ कहा जा रहा है, पर एक साल में 9 बाघ और 10 तेंदुए ट्रेन से कटकर मारे जा चुके हैं। यह रेल लाइन नवगठित रतापानी टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से होकर गुजरती है, फिर भी अंडरपास और ओवर पास जैसी सिफारिशों पर कोई अमल नहीं हुआ। वन विभाग और रेलवे प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे, जबकि प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने 12 दिसंबर 2025 को स्वयं स्वीकार किया कि बाघों की मौत करंट, सड़क और रेल हादसों तथा अधिकारियों की लापरवाही के कारण हो रही है और दोषी अफसरों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। 5 साल में ऐसे हुई बाघों की मौत यह खबर भी पढ़ें… पर्यटकों से 10 फीट दूर से गुजरे टाइगर, VIDEO पन्ना टाइगर रिजर्व में दो साल पुराने एक वीडियो के मामले में वन बल प्रमुख ने जांच के आदेश दिए हैं और सात दिन में रिपोर्ट मांगी है। दिसम्बर 2023 के इस वीडियो के आधार पर पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने नवंबर 2025 में टाइगर रिजर्व के गाइड और ड्राइवरों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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