माध्यमिक आचार्य नियुक्ति: अभ्यर्थियों के लिए सेंटर तक पहुंचना परीक्षा लिखने से ज्यादा बड़ी थी चुनौती

रांची झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा माध्यमिक आचार्य के पदों पर नियुक्ति के लिए आयोजित परीक्षा में शामिल होने पहुंचे हजारों अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा से पहले केंद्र तक पहुंचना ही कठिन परीक्षा बन गई। राज्य के विभिन्न जिलों और राज्य के बाहर से आए अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों की दूरी, अपर्याप्त परिवहन व्यवस्था और मनमाने ऑटो किराए के कारण भारी परेशानी झेलनी पड़ी। कई परीक्षा केंद्र रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से 15 से 20 किलोमीटर दूर बनाए गए थे। सार्वजनिक परिवहन के सीमित विकल्पों के कारण अभ्यर्थियों को 500 से 700 रुपए तक ऑटो किराया देना पड़ा। आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए अभ्यर्थियों के लिए यह बोझ असहनीय साबित हुआ। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा से पहले ही वे शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से थक चुके थे, जिसका सीधा असर परीक्षा प्रदर्शन पर पड़ना स्वभाविक है। {मो. इरफान : उत्तर प्रदेश के वाराणसी से पहली बार रांची आए थे। शहर से अंजान थे। इसलिए सेंटर तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अधिक किराया देकर ऑटो लिया और सेंटर तक पहुंचा। समय पर नहीं पहुंच पाता तो परीक्षा छूट जाती। {सुनील कुमार : दुमका से परीक्षा देने के लिए रांची आया था। स्टेशन से टाटीसिल्वे केंद्र तक जाने के लिए ऑटो को 700 रुपए देना पड़ा। मजबूरी में ऑटो लिया, क्योंकि वहां जाने के लिए अन्य विकल्प मेरे पास नहीं था। परीक्षा से पहले ही तनाव बढ़ गया। {सुनीता देवी: पहली बार किसी बड़ी प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल हो रही थी। गिरिडीह से रांची किसी तरह से बस से पहुंची। लेकिन परेशानी रांची में शुरू हुई। सेंटर तक जाने के लिए ऑटो को 600 रुपए किराया देना पड़ा। हम जैसे ग्रामीण अभ्यर्थियों के लिए यह बहुत मुश्किल है। { पूजा कुमारी: मऊ, यूपी से परीक्षा देने के लिए आई थी। केंद्र की लोकेशन और दूरी की स्पष्ट जानकारी पहले नहीं दी गई। अगर पहले से पता होता कि केंद्र इतना दूर है तो हम एक दिन पहले आ जाते या रहने की व्यवस्था करते। अचानक इतना खर्च आ गया।

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