वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक के दूसरे दिन झारखंड ने ऊर्जा के उत्पादन, उपभोग और सतत विकास और क्षेत्रीय नेतृत्व से जुड़े वैश्विक संवादों में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नीति निर्माताओं, निवेशकों और वैश्विक संगठनों के साथ कई चर्चाओं में भाग लिया। सीएम , कल्पना मुर्मू सोरेन एवं झारखंड के प्रतिनिधिमंडल के साथ स्वीडन-इंडिया बिजनेस काउंसिल की चीफ इंडिया रिप्रेज़ेंटेटिव सेसिलिया ओल्डने ने शिष्टाचार भेंट की व झारखंड- स्वीडन के बीच व्यापारिक सहयोग को और सुदृढ़ करने पर विस्तृत चर्चा हुई। रांची मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड केवल खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों का निर्यातक राज्य बनकर नहीं रहना चाहता। राज्य सरकार का लक्ष्य संसाधनों के मूल्य संवर्धन, सतत औद्योगिकीकरण और जन-केंद्रित विकास की दिशा में आगे बढ़ना है, ताकि झारखंड के लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिले। हमारा उद्देश्य केवल प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि उनका जिम्मेदार और सतत उपयोग सुनिश्चित करना है, ताकि रोजगार के अवसर सृजित हों और लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो। सीएम हेमंत सोरेन वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित उच्चस्तरीय राउंडटेबल मीटिंग डिलिवरिंग सस्टेनेबिलिटी ऐट स्केल: पाथवेज फॉर ग्लोबल ट्रांसफ़ॉर्मेशन में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने वैश्विक नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं एवं संस्थागत निवेशकों को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की उन पहलों का उल्लेख किया, जिनके माध्यम से खनिज आधारित डाउनस्ट्रीम उद्योगों, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन विकास के जरिए रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय एवं सामाजिक संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। दीर्घकालिक विकास दृष्टि को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने वैश्विक निवेशकों और साझेदारों को जिम्मेदार खनन, सतत विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा तथा पर्यटन अवसंरचना के क्षेत्र में झारखंड के साथ सहयोग के लिए आमंत्रित किया। महिला उद्यमिता पर चर्चा : कल्पना ने झारखंड का विकास मॉडल लोकाचार पर आधारित दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान झारखंड सरकार और ब्रिक्स चैंबर के सहयोग से महिला उद्यमिता पर उच्चस्तरीय चर्चा हुई। मौके पर कल्पना मुर्मू सोरेन ने कहा कि झारखंड का विकास मॉडल आदिवासी लोकाचार पर आधारित है, जहां महिलाओं के अदृश्य श्रम और आर्थिक योगदान को समावेशी व सतत विकास की नींव माना जाना जाता है। यहां जल, जंगल और जमीन के साथ हमारा संबंध केवल दोहन का नहीं, बल्कि संरक्षण और जिम्मेदारी का है।


