झारखंड में अधिकतर नियुक्ति परीक्षाएं विवादों में फंस जाती हैं। कभी समय पर परीक्षा नहीं होती। परीक्षा होती है तो रिजल्ट में काफी देर होती है। फिर रिजल्ट जारी होने के बाद मामला कोर्ट में पहुंच जाता है। लेकिन इस बार अलग तरह का मामला सामने आया है। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की माध्यमिक आचार्य के 1373 पदों के लिए पेपर-1 की परीक्षा में अभ्यर्थियों की बेरुखी सामने आई। 15 जनवरी से 19 जनवरी तक हुई इस परीक्षा में अभ्यर्थियों की भागीदारी उम्मीद से भी कम रही। कुल 50,004 अभ्यर्थियों को 16 परीक्षा केंद्रों पर सीट आवंटित किए गए थे। लेकिन इनमें से सिर्फ 25,188 अभ्यर्थी ही परीक्षा में शामिल हुए। यानी हर दूसरा अभ्यर्थी परीक्षा से गायब रहा। परीक्षा प्रक्रिया-सूचना तंत्र में खामियां माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की गैरहाजिरी गंभीर संकेत है। यह साफ बताता है कि परीक्षा प्रक्रिया और सूचना तंत्र में खामियां हैं। ग्रामीण क्षेत्र के अभ्यर्थी नियमित रूप से वेबसाइट या ई-मेल नहीं देखते, जबकि परीक्षा की सभी सूचनाएं इसके माध्यम से ही दी गई। इस कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। अगर किसी नियुक्ति परीक्षा में अपेक्षित संख्या में अभ्यर्थी शामिल नहीं होते तो इसके लिए स्पष्ट नीति होनी चाहिए। ऐसी स्थिति में अनुपस्थित अभ्यर्थियों को एक अवसर मिलना चाहिए। 3 बड़े कारण… जिससे अभ्यर्थियों ने परीक्षा से दूरी बनाई भरोसे की कमी अभ्यर्थियों की अनुपस्थिति का कारण भर्ती प्रक्रिया को लेकर बढ़ता अविश्वास है। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षक नियुक्ति में देरी, नियमों में बार-बार बदलाव और चयन प्रक्रिया पर उठे सवालों ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा के बाद भी नियुक्ति कब तक होगी, यही स्पष्ट नहीं रहता। बार-बार टलती प्रक्रिया बार-बार टलती भर्तियों ने अभ्यर्थियों को मानसिक रूप से थका दिया है। इस दौरान अभ्यर्थियों ने या तो कोई वैकल्पिक रोजगार अपना लिया या फिर अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की ओर मुड़ गए। इस कारण अनुपस्थिति कम रही। परीक्षा पैटर्न स्पष्ट नहीं परीक्षा से अनुपस्थित कुछ अभ्यर्थियों ने कहा कि पाठ्यक्रम और परीक्षा पैटर्न को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं था। चयन की संभावनाओं को लेकर अनिश्चितता ने उनपर परीक्षा छोड़ने का मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया। शिफ्ट-1 शिफ्ट-2 तारीख कुल आवंटन उपस्थित कुल आवंटन उपस्थित


