लुधियाना | मलौद तहसील पिछले एक सप्ताह से बंद है। जिस तहसीलदार की आईडी ब्लॉक की गई है, उस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, वहीं तहसील में किसी सब-रजिस्ट्रार की वैकल्पिक ड्यूटी भी नहीं लगाई गई। नतीजा यह कि आम जनता के साथ-साथ एनआरआई और जरूरतमंद परिवारों के करोड़ों रुपये फंस गए हैं। करीब 70 लोगों ने पहले से रजिस्ट्री की अपॉइंटमेंट ले रखी थी, जिनके लाखों-करोड़ों रुपए के स्टांप पेपर अब बेकार पड़े हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जो विदेशों से खासतौर पर अपनी जमीन की रजिस्ट्री करवाने आए थे। एनआरआई केसंत सिंह, जो जर्मनी से अपनी जमीन बेचने आए थे, ने बताया कि उन्होंने करीब 3 लाख रुपये के स्टांप लगाए थे और सरकारी फीस भी जमा करवा दी थी। सभी दस्तावेज पूरे होने के बावजूद रजिस्ट्री नहीं हो सकी। उन्हें 19 जनवरी की जर्मनी वापसी की टिकट भी कैंसिल करवानी पड़ी, जिससे अतिरिक्त आर्थिक नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि एक अधिकारी की गलती की सजा आम लोगों को भुगतनी पड़ रही है। अब यह भी स्पष्ट नहीं है कि पहले लगाए गए स्टांप वापस मिलेंगे या फिर दोबारा लाखों रुपये खर्च करने पड़ेंगे। बलबीर सिंह ने बताया, उन्होंने अपनी बेटी की शादी के लिए जमीन बेची थी। सभी दस्तावेज और लाखों रुपये की फीस जमा करने के बाद सिर्फ फोटो की प्रक्रिया बाकी थी, लेकिन तहसील बंद होने के कारण भुगतान रुक गया। जब तक रजिस्ट्री नहीं होगी, खरीदार पैसे नहीं देगा। फरवरी में बेटी की शादी है, लेकिन अब उन्हें समझ नहीं आ रहा कि शादी के लिए पैसे कहां से आएंगे। उन्होंने सरकार से अपील की कि जिन लोगों के दस्तावेज पूरे हैं, उनकी रजिस्ट्री तुरंत करवाई जाए। निर्मल कौर ने बताया, वे बेटे की पढ़ाई के लिए बैंक लोन चाहती थीं। उसके लिए रजिस्ट्री जरूरी थी, लेकिन 1 हफ्ते से मलौद तहसील के चक्कर काट रही हूं। लोन नहीं मिल पा रहा है।


