राजिम| नगर के वार्ड 14 पथर्रा में यादव परिवार के सौजन्य से आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के तीसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। व्यासपीठ से कथावाचक पंडित विनोद शर्मा ने कपिल देवहूति संवाद, ध्रुव चरित्र और सती चरित्र का मार्मिक वर्णन करते हुए श्रोताओं को धर्म, भक्ति और आत्मबल का संदेश दिया। कपिल-देवहूति प्रसंग में उन्होंने कहा कि सच्चा ज्ञान आत्मचिंतन से होता है और गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी मनुष्य वैराग्य व भक्ति के मार्ग पर चल सकता है। ध्रुव चरित्र के माध्यम से उन्होंने दृढ़ संकल्प और ईश्वर पर अटूट विश्वास का महत्व समझाया कि कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य स्पष्ट हो तो सफलता अवश्य मिलती है। वहीं सती चरित्र के वर्णन में नारी सम्मान, आत्मसम्मान और सत्य के पक्ष में अडिग रहने की प्रेरणा दी गई।


