उदयपुर विकास प्राधिकरण:सरे में चुनिंदा विला-होटल पर कार्रवाई से उठ रहे यूडीए पर सवाल, हकीकत- एक किमी में 25 से ज्यादा बड़े होटल्स-रिसॉर्ट्स-विला बन रहे

उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) 19 जनवरी को राजस्व ग्राम सरे में होटल, रिसॉर्ट और विला के खिलाफ की गई सीज कार्रवाई पर अपनी पीठ थपथपा रहा है, लेकिन यह कार्रवाई चुनिंदा ही रही। यूडीए ने केवल मालदीव्स विला (17 विला) और वेलेसा होटल पर कार्रवाई की, जबकि इसी क्षेत्र की एक किलोमीटर की परिधि में 25 से अधिक बड़े होटल, रिसॉर्ट, विला और अन्य भवनों को छुआ तक नहीं गया। कई भवन मालिकों को केवल नोटिस देकर खानापूर्ति कर दी गई। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि यूडीए की टीम सरे में नंदा हिल होटल एंड रिसॉर्ट्स के ठीक नीचे, महज 100 मीटर पहले सड़क तोड़कर लौट गई और उसी होटल तक जाने वाले मार्ग पर कोई कार्रवाई नहीं की। लाभगढ़ रिसॉर्ट्स के पीछे पहाड़ियों को काटकर कच्ची सड़क बनाने का काम जारी है और तलहटी में धड़ल्ले से निर्माण चल रहा है, जिसे अभी तक नहीं रोका गया है। बड़ा सवाल…यूडीए अधिकारियों को निर्माण दिखे ही नहीं या मिलीभगत सरे में पेट्रोल पंप के पास पहाड़ियों के ऊपर से भी सड़कें बना दी गई हैं। ये होटल-रिसॉर्ट और विला तक जाती हैं, जहां बड़े पैमाने पर पहाड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन यूडीए की टीम यहां नहीं पहुंची। कैलाशपुरी में मुख्य सड़क से लेकर एक किलोमीटर अंदर तक कई पहाड़ काटे जा चुके हैं और पांच सितारा होटलों का निर्माण खुले आम चल रहा है, फिर भी यहां सीज या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हुई है। इससे यूडीए की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 2 साल में पहाड़ काटकर 100 से अधिक बहुमंजिला निर्माण हुए पिछले साल 2025 में राजस्व ग्राम सरे, मोहनपुरा खुर्द, कैलाशपुरी सहित 70 गांवों को यूडीए में शामिल किया गया। इससे पहले ही होटल, रिसॉर्ट और विला निर्माण के लिए मालिकों ने ग्राम पंचायतों, तहसीलों और उपखंडों से स्वीकृतियां व अनापत्ति प्रमाण-पत्र ले लिए थे। इसके बाद पहाड़ काटकर सड़कें बनाई गईं और बहुमंजिला होटल, रिसॉर्ट, विला, भवन और मंदिर बनाए गए। उस समय पहाड़ों की ऊंचाई संपर्क सड़क से मापी जाती थी, न कि सैटेलाइट से। इसी खामी का फायदा उठाकर 2020 से 2025 के बीच सरे, मोहनपुरा खुर्द, कैलाशपुरी और चीरवा में 100 से अधिक बहुमंजिला निर्माणों के लिए पहाड़ काटे गए। अब नए नियमों के तहत 15 डिग्री से अधिक ढलान वाले पहाड़ नहीं काटे जा सकते और ऊंचाई की मैपिंग सैटेलाइट से होती है। ऐसे में सवाल है कि यूडीए पंचायत, तहसील और उपखंड स्तर पर दी गई पुरानी अनुमतियों को अदालत में कैसे चुनौती देगा?

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