प्रदेश में जमीन के कलेक्टोरेट गाइडलाइन में शासन ने आंशिक बदलाव करने का निर्णय लिया है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र की गाइडलाइन दर में 50 से 100%, तो शहरी क्षेत्रों में आंशिक रूप से बदलाव किए जाने के संकेत हैं। शासन ने गाइडलाइन में बदलाव के लिए प्रदेशभर से जिला कलेक्टरों से पुनरीक्षण (रिव्यू) प्रस्ताव मांगा था। इसमें अधिकांश कलेक्टर ने अपने-अपने जिले में जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य, रजिस्ट्री दरों और आम जनता पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन कर प्रस्ताव तैयार किया है। इन्हीं प्रस्तावों के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में दर घटाई जाएगी। अफसरों की मानें तो प्रदेश के ज्यादातर जिलों की समीक्षा हो चुकी है। संशोधित गाइडलाइन जल्द ही जारी होगी। वास्तविक सौदों के आधार पर तय होगी कीमत
नई गाइडलाइन में इस बात का ध्यान रखा गया है कि जमीन की दर वास्तविक बाजार के आधार पर तय की जाए। यही कारण है कि शासन ने सभी कलेक्टरों को स्पष्ट किया था कि जमीन की दरें तय करते समय केवल संभावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक बाजार सौदों को ध्यान में रखें। कलेक्टरों ने भी इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार शहरी क्षेत्रों में विकास, लोकेशन और सुविधाओं के आधार पर आंशिक और ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतम 100% तक बढ़ोतरी के प्रस्ताव आए हैं। अफसरों का मानना है कि इससे गाइडलाइन और बाजार मूल्य के बीच संतुलन बना रहेगा। नवंबर में आई थी नई गाइडलाइन, आपत्तियों का अंबार
ज्ञात हो कि साल 2017-18 के बाद नवंबर-2025 में शासन ने जमीन के रेट में बढ़ोत्तरी की। नई गाइडलाइन ने आम लोगों के साथ-साथ रियल एस्टेट सेक्टर को भी बड़ा झटका लगा था। ग्रामीण के कई इलाकों में जमीन की दरें अचानक 5 से 6 गुना तक बढ़ गई थी। इसका सीधा असर रजिस्ट्री खर्च पर पड़ा, जिससे संपत्ति खरीदना और बेचना आम लोगों के लिए मुश्किल हो गया। कई जगहों पर रजिस्ट्री की संख्या में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि बिल्डरों और निवेशकों ने सौदे रोक दिए थे। इसके साथ ही शासन के इस आदेश को लेकर कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुआ था। शासन ने अब इसे बदलने का निर्णय लिया है। जिलों से प्रस्ताव मिल चुके
प्रदेश में जमीन गाइडलाइन के लिए जिला मूल्यांकन समितियों से प्रस्ताव मंगवाया गया था। जिलों का प्रस्ताव अंतिम चरण में पहुंच चुका है। कोशिश है कि अगले 10 दिनों के भीतर संशोधित गाइडलाइन जारी कर दी जाए।
-पुष्पेंद्र मीणा, आईजी पंजीयक


