कायाकल्प रिपोर्ट:हेल्थ सेंटर टॉप रैंकिंग से बाहर, जिला अस्पताल भी छठवें नंबर पर; ग्रामीण इलाकों ने मारी बाजी

स्वास्थ्य विभाग की ताजा कायाकल्प मूल्यांकन रिपोर्ट ने राजधानी के स्वास्थ्य तंत्र की पोल खोल दी है। 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, रायपुर का कोई भी शहरी या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तय मानकों पर खरा नहीं उतर सका। कायाकल्प योजना के तहत साफ-सफाई, संक्रमण नियंत्रण, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, शौचालय, पेयजल, रोशनी और मरीजों की सुरक्षा जैसे बुनियादी बिंदुओं पर सख्त मूल्यांकन किया जाता है। इन सभी मानकों पर प्रदेश के कई जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन राजधानी पूरी तरह पिछड़ गई। हैरानी की बात यह है कि इसी रिपोर्ट में रायपुर जिले के ग्रामीण इलाकों के कई स्वास्थ्य केंद्रों ने बेहतर स्कोर हासिल किया है और टॉप रैंकिंग में जगह बनाई है। राजधानी के शहरी केंद्रों का स्कोर न कर पाना साफ तौर पर यह दर्शाता है कि व्यवस्थाएं कागज़ी दावों तक सीमित हैं और ज़मीनी स्तर पर विभागीय मानकों का पालन नहीं हो रहा। जिला अस्पतालों में सूरजपुर अव्वल, रायपुर छठवां
जिला अस्पतालों की श्रेणी में सूरजपुर जिला अस्पताल ने 94.9 प्रतिशत स्कोर के साथ प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। बलौदाबाजार दूसरे और बिलासपुर तीसरे स्थान पर रहे। राजधानी रायपुर का जिला अस्पताल 87.7 प्रतिशत स्कोर के साथ छठवें स्थान पर रहा। वहीं इको-फ्रेंडली कैटेगरी में रायपुर का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) श्रेणी में मुंगेली जिले का लोरमी सीएचसी विजेता रहा। रायपुर जिले का धरसींवा सीएचसी तीसरे स्थान पर रहा, लेकिन राजधानी के अन्य सीएचसी टॉप रैंकिंग में जगह नहीं बना सके। सब हेल्थ सेंटर श्रेणी में बालोद-बेमेतरा सबसे आगे
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) श्रेणी में ग्रामीण क्षेत्रों का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। बलौदाबाजार, महासमुंद, दुर्ग, रायगढ़ और सूरजपुर के कई पीएचसी ने 95 से 100 प्रतिशत तक स्कोर हासिल किया। रायपुर जिले के ग्रामीण पीएचसी-फरफौद, दोंदेकला और मंदिरहसौद-टॉप स्कोरर्स की सूची में शामिल रहे। अर्बन प्राइमरी हेल्थ सेंटर (यूपीएचसी) श्रेणी में राजनांदगांव का शंकरपुर यूपीएचसी पहले स्थान पर रहा। सब हेल्थ सेंटर श्रेणी में बालोद, बलरामपुर, बेमेतरा और बीजापुर के केंद्रों ने बाजी मारी। ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों के केंद्रों ने सफाई रैंकिंग अच्छी रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की जमीनी हकीकत ने खोली पोल गुढ़ियारी सीएचसी – मुख्य प्रवेश द्वार पर गंदगी और कचरा बिखरा मिला। वेटिंग एरिया में फर्श पर धूल की परत जमी थी। तीन रंग के डस्टबीन का प्रावधान होने के बावजूद केवल एक डस्टबीन उपलब्ध था। परिसर और बाथरूम की साफ-सफाई भी संतोषजनक नहीं पाई गई। भाठागांव सीएचसी: परिसर में प्रवेश करते ही साफ-सफाई की कमी नजर आई। ओपीडी और वेटिंग एरिया में गंदगी और फर्श पर धूल जमी हुई थी। कचरा पृथक्करण के लिए निर्धारित डस्टबीन नहीं रखे गए थे। शौचालयों में दुर्गंध और गंदगी पाई गई।
मठपुरैना पीएचसी: सेंटर के आसपास और प्रवेश मार्ग पर सफाई का अभाव दिखा। वेटिंग एरिया में बैठने की जगह के पास फर्श गंदा था। बायोमेडिकल और सामान्य कचरे के प्रबंधन की व्यवस्था कागज़ों तक सीमित नजर आई। परिसर में सालों से खड़ी कंडम एंबुलेंस में असामाजिक तत्वों द्वारा शराब पीने की शिकायतें भी सामने आईं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *