छत्तीसगढ़ का पहला पुलिस कमिश्नरी सिस्टम रायपुर में 23 जनवरी से लागू होगा। इस पर बुधवार को मंत्री परिषद की बैठक में अंतिम मुहर लगेगी। नगर निगम सीमा के बाहर भी इसका दायरा बढ़ाने की तैयारी है। नवा रायपुर अटल नगर, माना समेत कई थानों को इसमें शामिल किया जा रहा है। इसे पूरे जिले में लागू करने के संकेत भी मिल रहे हैं। हालांकि पुलिस के अधिकारों में कटौती की बात कही जा रही है, लेकिन दायरा बढ़ाने की तैयारी है। दरअसल, इस मुद्दे को दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से उठाया था। भास्कर ने कमिश्नरी सिस्टम के दायरे को लेकर सर्वे भी किया था। सर्वे में शामिल 90 फीसदी लोगों का कहना था कि पुलिस कमिश्नरी सिस्टम में नवा रायपुर को भी शामिल किया जाए। मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजी ने भी इसका समर्थन किया है। उनका मानना है कि किसी राज्य की कानून व्यवस्था मजबूत होती है तो निवेश बढ़ता है, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बनते हैं और सबसे बड़ी बात, लोगों का सरकार पर भरोसा बढ़ता है। इसका उदाहरण उत्तर प्रदेश है, जहां मजबूत लॉ एंड ऑर्डर के चलते सरकार दोबारा सत्ता में आई। छत्तीसगढ़ सरकार को इस पर सख्त फैसला लेते हुए संपूर्ण अधिकारों के साथ पूरे जिले में इसे लागू करना चाहिए। 31 दिसंबर को ऐलान, लेकिन 21 दिनों में गृह विभाग नहीं तैयार कर पाया खाका मंत्रिपरिषद की 31 दिसंबर 2025 को हुई बैठक में 23 जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू करने का फैसला लिया गया था। गृह विभाग को इसका खाका तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन 21 दिनों में अधिकारी खाका तैयार नहीं कर पाए। चर्चा है कि कुछ आईएएस अधिकारियों को पूरे जिले में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू करने पर आपत्ति है। वे पुलिस को प्रशासन के अधीन ही रखना चाहते हैं। इसे लेकर वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार मुलाकात कर आपत्ति दर्ज कराई जा रही है। इसी वजह से खाका तैयार करने में देरी हो रही है। सरकार की मंशा, पूरे जिले में हो सिस्टम
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने पूरे जिले में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू करने के लिए कई बार पत्र लिखा है। उन्होंने एडीजी कमेटी का कमेटी ने पूरे अधिकार देने की सिफारिश की है। बताया जा रहा है कि सीएम विष्णुदेव साय ने भी पूरे जिले में इसे लागू करने को लेकर अधिकारियों से चर्चा की है। संकेत हैं कि सरकार की मंशा पूरे जिले में मजबूत कमिश्नरी लागू करने की है। दो तरह की पुलिसिंग से ज्यादा खर्च
रायपुर में दो तरह की पुलिसिंग व्यवस्था होने पर सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। अगर निगम सीमा के बाहर देहात पुलिस सिस्टम रहेगा तो नए जिले की तरह वहां नया सेटअप तैयार करना होगा। देहात में एसपी, एएसपी, डीएसपी के लिए नए कार्यालय, नई पुलिस लाइन, नया कंट्रोल रूम, वायरलेस सिस्टम, वाहन समेत अन्य व्यवस्थाओं पर 50 करोड़ से अधिक खर्च आएगा। थानों का दायरा हो जाएगा कम
अगर देहात पुलिसिंग सिस्टम लागू हुआ तो नगर निगम क्षेत्र से सटे कई थानों का दायरा सिमट जाएगा। क्योंकि इन थानों के कई इलाके या गांव पंचायत क्षेत्र में आते हैं। इन इलाकों को देहात थानों में शामिल किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ेगी। विधानसभा थाना क्षेत्र से लगे सेमरिया, नरदहा और बरोंदागांव में बड़े स्कूल और कॉलेज हैं। ये इलाके देहात क्षेत्र में चले जाएंगे। इन इलाकों से विधानसभा थाना की दूरी लगभग एक किलोमीटर है, जबकि इन्हें खरोरा या सिलतरा थाना में शामिल किया जाएगा, जिनकी दूरी 25 से 35 किलोमीटर है। लोगों को शिकायत के लिए इतनी दूर जाना पड़ेगा। एक्सपर्ट्स बोले… कमिश्नर को बिना कटौती पूरे अधिकार दें, औद्योगिक क्षेत्र से एयरपोर्ट तक आए दायरे में; सफल सिस्टम को रायपुर में लागू करें रायपुर तेजी से बढ़ता हुआ शहर है। इसलिए यहां मजबूत और सख्त पुलिस कमिश्नरी की आवश्यकता है। नवा रायपुर को इसका हिस्सा बनाया जाना चाहिए। नगर निगम सीमा में तदानुसार संशोधन किया जाना चाहिए। पुलिस कमिश्नर को पूरे अधिकार दिए जाने चाहिए। किसी के दबाव या हस्तक्षेप में अधिकारों में कटौती नहीं होनी चाहिए। लागू करने के नाम पर आधे-अधूरे अधिकार देना पुलिस को कमजोर करेगा।
-राजीव माथुर, रिटायर्ड डीजी, छत्तीसगढ़ औद्योगिक क्षेत्र, एयरपोर्ट, मंत्रालय और सचिवालय को पुलिस कमिश्नरी के दायरे में आना चाहिए। इसका दायरा पूरा जिला भी हो सकता है। पुलिस को अपराध से जुड़े सभी अधिकार दिए जाने चाहिए। गन लाइसेंस और आबकारी लाइसेंस का अधिकार भी पुलिस के पास होना चाहिए। पुलिस को जितने अधिक अधिकार मिलेंगे, उतनी सख्त पुलिसिंग होगी और अपराध पर प्रभावी रोक लगेगी।
– आरके विज, रिटायर्ड स्पेशल डीजी, छत्तीसगढ़ दिल्ली, मुंबई और कानपुर की तरह रायपुर में भी पूरे जिले में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू किया जाना चाहिए। दो तरह की पुलिसिंग व्यवस्था से कई व्यावहारिक दिक्कतें आएंगी और नया सेटअप तैयार करने में अतिरिक्त खर्च होगा। सरकार को किसी दबाव में आए बिना पुलिस को पूरे अधिकार देने चाहिए। देश में जहां यह व्यवस्था सफल है, उसी मॉडल को रायपुर में लागू किया जाना चाहिए। निगम सीमा के बाहर भी इसका दायरा बढ़ाया जाना चाहिए।
-अन्वेष मंगलम, रिटायर्ड स्पेशल डीजी, मध्यप्रदेश


