सतना में नागरिकों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने खाद्य सुरक्षा विभाग को आधुनिक टीपीएम मीटर उपलब्ध कराया है। इस मशीन की मदद से अब होटल, रेस्टोरेंट और ठेलों पर इस्तेमाल हो रहे कुकिंग ऑयल की मौके पर ही जांच की जा सकेगी। टीपीएम मीटर यह तुरंत बताता है कि तेल खाने योग्य है या बार-बार उपयोग किए जाने के कारण स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो चुका है। दरअसल, एक ही तेल को बार-बार गर्म करने से उसमें टोटल पोलर मटेरियल (TPM) की मात्रा बढ़ जाती है। तय सीमा से अधिक टीपीएम वाला तेल शरीर के लिए जहरीला साबित हो सकता है। होटलों में तुरंत पकड़ में आएगा खराब तेल
मंगलवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारी अभिषेक बिहारी गौड़, शीतल सिंह और अशोक कुर्मी ने टीपीएम मीटर से कई प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान केएफसी, होटल यूएसए इन, वीर सिनेमा और गुप्ता समोसा की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान गुप्ता समोसा में समोसे तलने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे तेल की जांच की गई, जिसमें टीपीएम स्तर 25 से अधिक पाया गया, जो मानकों से काफी ज्यादा है। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए अधिकारियों ने मौके पर ही खराब तेल नष्ट कराया और संचालक को सख्त निर्देश दिए कि आगे से समय रहते तेल बदला जाए। पहले जांच रिपोर्ट में लगता था समय
खाद्य सुरक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में दोबारा जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई, न्यायालयीन प्रकरण और लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने बताया कि खाद्य तेल का बार-बार उपयोग करना नियमों के खिलाफ है और सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। पहले इसकी जांच के लिए कोई मशीन उपलब्ध नहीं थी, लेकिन अब टीपीएम मीटर की मदद से तेल की गुणवत्ता तुरंत जांची जा सकेगी, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार उपयोग किए गए तेल से हृदय रोग, कैंसर, लीवर की बीमारी, तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं और सूजन जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि सतना में अब खराब और जहरीले तेल के इस्तेमाल को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


