जयपुर में पोलो प्रेमियों के लिए खुशखबरी है। ऐतिहासिक राजस्थान पोलो क्लब ग्राउंड में पोलो के मुकाबले अब दिन के साथ रात में भी खेले जाएंगे। जयपुर पोलो सीजन की शुरुआत के साथ ही क्लब में फ्लड लाइट में मैच करने पर प्लानिंग पूरी कर ली है। उन्होंने कहा- इस बार हम जेंट्स, लेडीज और जूनियर तीनों फॉर्मेट में खेलेंगे। इसके बाद गर्मियों में भी शाम और रात को पोलो मैचों का आयोजन हो सकेगा। अंतरराष्ट्रीय पोलो खिलाड़ी सवाई पद्मनाभ सिंह ने दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत में यह बताया। पद्मनाभ सिंह ने बताया- पोलो को आम लोगों से जोड़ने और खेल को पूरे साल सक्रिय रखने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित होगा। लोग और परिवार रात में भी पोलो का आनंद ले सकेंगे। यह पहल जयपुर के साथ देशभर में पोलो खेल के लिए नई पहचान और अनुभव लेकर आएगी। वहीं पद्मनाभ सिंह ने कहा- कश्मीर, मैसूर और ग्वालियर के नाम वाली तीन ट्रॉफी के टूर्नामेंट करीब 100 साल पहले खेले जाते थे। इन टूर्नामेंट में पूर्व राज परिवार के सदस्य खेलते थे। ये टूर्नामेंट अब हर साल खेले जाएंगे। जयपुर पोलो सीजन की शुरुआत हो गई है। इसकी किस तरह की तैयारी है? किस तरह दर्शकों को आमंत्रित कर रहे हैं?
पद्मनाभ सिंह: हर साल की तरह जयपुर पोलो सीजन शुरू हो गया है। इस साल हर बार से सबसे बड़ा सीजन होगा। पिछले सात महीने के सीजन में हमने जयपुर में सात महीने पोलो खेला है। यह जयपुर के लिए बड़ी बात है। जयपुर का सीजन मंगलवार से शुरू हुआ। दिल्ली, मुम्बई सहित कई शहरों की टीम यहां खेलने आएगी। इसमें दो हाइलाइट्स रहेंगे। इसमें 14 गोल के दो हाई गोल इंटरनेशनल टूर्नामेंट होंगे। इसके अलावा इंडिया वर्सेज फ्रांस का मैच भी होगा। एक लेडीज इंटरनेशनल और एक जूनियर इंटरनेशनल मैच होगा। साथ ही पोलो क्लब ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसमें फ्लड लाइट ग्राउंड पर लगवा रहे हैं। इसमें लोग रात को पोलो मैच देख सकते हैं। परिवार के साथ पोलो को एन्जॉय कर सकेंगे। इसके अलावा जूनियर्स के डवलपमेंट में काफी इन्वेस्टमेंट किए हैं। हमने जूनियर्स के लिए स्कॉलरशिप शुरू की है। हर साल एक जूनियर प्लेयर को फाइनेंशियल कंट्रीब्यूशन देंगे। वहीं तीन दिन गेम के लिए परमानेंट कर दिए हैं। बुधवार, शनिवार और रविवार को राजस्थान पोलो ग्राउंड मैच खेले जाएंगे। इसके अलावा भी एक या दो दिन अन्य मैच भी होगा। सात महीने का पोलो सीजन जयपुर खेल चुका है। अब 12 महीने खेलने की तैयारी है, इसकी क्या प्लानिंग की गई है?
पद्मनाभ सिंह: हमारे यहां सबसे बड़ा चैलेंज अप्रेल और मई महीने में आता है। दोपहर में तेज गर्मी रहती है, हम उस समय खेल नहीं पाते। ऐसे में फ्लड लाइट में रात में मैच करा सकेंगे। यह जयपुर के लिए नई चीज हो जाएगी। गर्मी में जहां कोई इवेंट नहीं होता, उस वक्त लोगों को पोलो मिलेगा। जो खिलाड़ी पोलो पर ही डिपेंडेंट हैं, उनके लिए भी यह चीज फायदेमंद रहने वाली है। आप पहली बार मेयो कॉलेज में हॉर्स पर चढ़े थे। अब हॉर्स के साथ कितना टाइम बिताते हैं, अभी कौन आपका फेवरेट हॉर्स है?
पद्मनाभ सिंह: जब आप पोलो के खिलाड़ी होते हैं, घोड़े जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाते हैं। मेरे पास बहुत सारे घोड़े हैं। उनमें कुछ घोड़े ऐसे हैं, जो एक लेवल ऊपर होते हैं। इस बार मैं ग्रे कलर की नई घोड़ी लेकर आया हूं। इसका नाम इंजिजोसा है। मेरे पास अभी वाइट और ग्रे कलर की घोड़ी है, जो काफी तेज दौड़ती है।
फ्लड लाइट के बाद क्या यह देश का पहला ग्राउंड बन जाएगा, जहां 12 महीने मैच होंगे?
पद्मनाभ सिंह: यह पहला ऐसा क्लब होगा, जो गर्मियों में भी टूर्नामेंट करवाएगा। दिल्ली में नवीन जिंदल का ग्राउंड है, जहां फ्लड लाइट है, लेकिन वह उनका निजी ग्राउंड है। जयपुर में देश का पहला क्लब होगा, जो टूर्नामेंट ऑर्गेनाइज करेगा और ओपन पार्टिसिपेंट्स होगा।
पहली बार पोलो के लिए हॉस्पिटल बनने वाला है। इसकी क्या प्लानिंग है?
पद्मनाभ सिंह: मेरे ख्याल में हॉर्स वेलफेयर पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता। खिलाड़ी के वेलफेयर के लिए मैदान में हॉस्पिटल की टीम जरूर रहती है। हमारे लिए दुर्लभजी हॉस्पिटल की टीम कई साल से खिलाड़ियों की देखभाल और उनकी मेडिकल इमरजेंसी के लिए काम कर रही है। हमने तय किया है कि जयपुर पोलो क्लब में हम इक्वाइंन हॉस्पिटल बनाएंगे। पशु चिकित्सक होंगे, जो किसी भी हॉर्स को गेम के दौरान और गेम के बाद इलाज दे सकेंगे। बाहर से भी लोग अपने घोड़ों को यहां दिखा सकेंगे। इस बार आप पुरानी ट्रॉफी को रिवाइव करने वाले हैं। 100 साल पुरानी ट्रॉफी के मैच होंगे?
पद्मनाभ सिंह: हम यहां इतना गेम खेल रहे हैं। अब हमें ट्रॉफी की जरूरत पड़ने लगी थी। इसके बाद पता चला कि जयपुर में इतनी पुरानी ट्रॉफी मौजूद हैं, जिसकी पूरे देश में अलग पहचान थी। हमने कश्मीर, मैसूर और ग्वालियर के नाम वाली तीन ट्रॉफी को फिर शुरू करने की चर्चा की तो प्लेयर्स में उत्साह देखने को मिला। ये ट्रॉफी पूर्व राज परिवार के सदस्य खेलते थे। इसमें कई टूर्नामेंट 100 साल पुराने हैं और कई 80 साल से खेले नहीं गए। ये टूर्नामेंट अब हर साल खेले जाएंगे। इन ऐतिहासिक ट्रॉफी को राजा मान सिंह, राव राजा हनुत सिंह ने भी जीता था।
आपको अर्जुन अवॉर्ड के लिए नामित किया गया। एक पोलो प्लेयर के रूप में कितना गर्व महसूस हो रहा है?
पद्मनाभ सिंह: पहले भी प्लेयर्स को पोलो क्षेत्र में अर्जुन अवॉर्ड मिला है। ऐसे में यह पहली बार नहीं है। सिमरन शेरगिल, समीर सुहाग और कर्नल रवि राठौड़ को अर्जुन अवॉर्ड मिला है। पोलो प्लेइंग कम्युनिटी इस तरफ ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। हमारी छोटी कम्युनिटी है। हमारा फोकस है कि पोलो को कैसे आगे बढ़ाएं। लोगों को जोड़ना प्राथमिकता है। अवॉर्ड और रिक्ग्निशन की तरह ज्यादा ध्यान नहीं रहता है। यह खबर भी पढ़ें… जयपुर के पद्मनाभ सिंह अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित:भारतीय पोलो टीम के कप्तान रह चुके, पोलो के जरिए देश को दिलाई वैश्विक पहचान जयपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य पद्मनाभ सिंह को राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025 के अंतर्गत अर्जुन पुरस्कार के लिए सिफारिश की गई है। 26 साल के पद्मनाभ सिंह भारतीय पोलो टीम के कप्तान रह चुके हैं। पद्मनाभ सिंह उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और नरेंद्र सिंह के बेटे हैं। पद्मनाभ ने मेयो कॉलेज, अजमेर और इंग्लैंड के मिडफील्ड स्कूल से शिक्षा प्राप्त की है। पद्मनाभ सिंह ने बचपन से ही पोलो खेलना शुरू कर दिया था। (पूरी खबर पढ़ें)


