शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर और भाषा के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। ‘प्रखर राजस्थान 2.0’ अभियान की सफलता के बाद, अब छात्रों के मौखिक पठन प्रवाह (ओरल रीडिंग फ्लुएंसी) का आकलन किया जाएगा। विद्यार्थियों की पढ़ाई में हुए सुधार का मूल्यांकन होगा यह विशेष अभियान 23 जनवरी तक चलेगा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस आकलन का मुख्य उद्देश्य सौ दिवसीय ‘प्रखर राजस्थान 2.0’ पठन अभियान के बाद विद्यार्थियों की पढ़ने की गति और शुद्धता में हुए सुधार का मूल्यांकन करना है। इसके परिणामों के आधार पर आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए रणनीति तैयार की जाएगी। यह पहला अवसर है जब विद्यार्थियों की क्षमता का मूल्यांकन लिखित परीक्षाओं के बजाय पढ़ने के प्रवाह पर विशेष जोर देकर किया जा रहा है। शिक्षकों को दिशा-निर्देश जारी विशेषज्ञों का मानना है कि जो विद्यार्थी तेजी और स्पष्टता से पढ़ पाते हैं, उनकी समझने की क्षमता खुद ब खुद बेहतर होती है। इस पांच दिवसीय कार्यक्रम के लिए शिक्षकों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी कक्षा के स्तर के अनुरूप कहानी या अनुच्छेद पढ़ने के लिए दिया जाएगा। स्टॉप वॉच में रिकॉर्ड होगी रीडिंग स्पीड शिक्षक स्टॉप वॉच का उपयोग करके यह रिकॉर्ड करेंगे कि विद्यार्थी एक मिनट में कितने शब्द सही ढंग से पढ़ पा रहा है। आकलन के दौरान प्राप्त आंकड़ों को शिक्षा विभाग के पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इससे कमजोर क्षेत्रों और विद्यार्थियों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जिसके आधार पर सुधारात्मक शैक्षणिक योजनाएं बनाई जा सकेंगी। रटने की आदत होगी कम अभियान का लक्ष्य कक्षा-वार प्रति मिनट सही पढ़े गए शब्दों का आकलन करना है। शिक्षा विभाग का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में रटने की प्रवृत्ति को कम करके समझ के साथ पढ़ने की आदत विकसित करना है। ‘प्रखर राजस्थान’ ने एक मजबूत नींव रखी है, और अब ओआरएफ आकलन से विद्यार्थियों की वास्तविक प्रगति का सटीक मूल्यांकन संभव होगा।


