बालाघाट जिले में इस साल लक्ष्य से ज्यादा धान की खरीदी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारी बारिश से फसलों को हुए नुकसान के बावजूद रिकॉर्ड खरीदी होने पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस विधायक ने इस पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए अंदेशा जताया है कि बिचौलियों के माध्यम से बाहरी जिलों का धान यहां खपाया गया है। कांग्रेस विधायक ने मीडिया से चर्चा में कहा कि अतिवृष्टि के कारण जिले में 30 से 40 प्रतिशत फसलें बर्बाद हुई थीं। उन्होंने खुद 10 से 15 गांवों का दौरा कर नुकसान देखा था। विधायक का तर्क है कि जब पैदावार कम हुई, तो प्रशासन लक्ष्य से अधिक खरीदी कैसे दिखा रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन फर्जी आंकड़ों के जरिए अपनी पीठ थपथपा रहा है, जबकि इस विसंगति की गहराई से जांच होनी चाहिए। 1441 करोड़ से ज्यादा की हुई खरीदी आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए जिले में 1 दिसंबर से 20 जनवरी तक धान की खरीदी की गई। इस दौरान 1 लाख 17 हजार 156 पंजीकृत किसानों से कुल 60 लाख 85 हजार 450 क्विंटल धान खरीदा गया, जिसकी कुल कीमत 1441 करोड़ 64 लाख 31 हजार रुपए है। परिवहन में देरी और भुगतान का संकट धान खरीदी तो हो गई, लेकिन उसका उठाव न होने से किसानों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। अब भी करीब 11 लाख क्विंटल से ज्यादा धान सोसायटियों में ही पड़ा है। गोदामों तक माल न पहुंचने के कारण कई किसानों का भुगतान अटका हुआ है। हालांकि, आपूर्ति अधिकारी का दावा है कि 90 प्रतिशत धान का परिवहन हो चुका है और किसानों को 1110 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।


