राजस्थान जाट महासभा ने पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण और रोटेशन पद्धति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। महासभा ने इस संबंध में प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम डीडवाना कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा गया है कि बार-बार के राजनीतिक हस्तक्षेप और आरक्षण की रोटेशन प्रणाली के कारण ग्रामीण विकास की रीढ़ मानी जाने वाली ये संस्थाएं लगभग निष्क्रिय होती जा रही हैं। महासभा के जिला अध्यक्ष गोपीराम बिजारणिया द्वारा भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया कि वर्ष 1994 के बाद पंचायती राज में विभिन्न प्रकार के आरक्षण लागू किए गए। इसका एक नकारात्मक परिणाम ‘पति-सरपंच’ और ‘पति-प्रधान’ जैसी गैर-कानूनी व्यवस्थाओं के रूप में सामने आया है। इसमें निर्वाचित महिला प्रतिनिधि के स्थान पर उनके पति वास्तविक सत्ता का संचालन करते हैं, जो लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत है। ज्ञापन में यह भी बताया गया कि प्रत्येक चुनाव में वार्ड या अध्यक्ष पद का वर्ग बदलने से किसी भी जनप्रतिनिधि के दोबारा चुने जाने की संभावना मात्र 5 प्रतिशत रह जाती है। इससे पंचायती राज संस्थाओं में अनुभव, निरंतरता और दक्ष नेतृत्व का अभाव उत्पन्न हो गया है। महासभा के अनुसार, ग्राम सभाओं की स्थिति भी अत्यंत दयनीय है, जहां सरकारी कर्मचारियों के अतिरिक्त ग्रामीणों की उपस्थिति नगण्य रहती है।
राजस्थान जाट महासभा ने पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा ओबीसी वर्ग को विभाजित करने के प्रयासों की कड़ी निंदा की। पत्र में कहा गया कि पिछड़े वर्ग के भीतर विभाजन से किसी भी समाज को राजनीतिक फायदा नहीं मिला, बल्कि इससे सामाजिक समरसता प्रभावित हुई और पंचायती राज संस्थाएं और अधिक कमजोर हुईं। महासभा ने मांग की है कि पंचायती राज में अनुभव और योग्यता को प्राथमिकता देने के लिए वर्तमान विसंगतियों को दूर किया जाए। इसके साथ ही, ओबीसी वर्ग के भीतर सामाजिक व राजनीतिक विभाजन की प्रवृत्ति को तत्काल समाप्त किया जाए तथा स्थानीय निकायों में वास्तविक एवं सक्षम प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए ठोस अध्ययन कराया जाए।पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से यह भी आग्रह किया कि ओबीसी आयोग के माध्यम से किए जा रहे सर्वेक्षण में इन बुनियादी समस्याओं को शामिल किया जाए, ताकि ग्रामीण लोकतंत्र को पुनः सशक्त बनाया जा सके। ज्ञापन सौंपने वालों में गोपीराम बिजारणियां (जिला अध्यक्ष, राजस्थान जाट महासभा, डीडवाना-कुचामन), पूसाराम ठोलिया (अध्यक्ष, प्रवासी राजस्थान जाट महासभा), हरीश ठोलिया, नाथूराम ठोलिया (अध्यक्ष, जाट महासभा राजस्थान), पन्नाराम भामु सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।


