चित्तौड़गढ़ में बुधवार देर रात एक मारपीट और जबरन उठाने का मामला सामने आने के बाद पूरे पुलिस विभाग में हलचल मच गई। इस मामले में साइबर सेल के डीएसपी गिरिराज गर्ग और उनके साथी अनिल सनाढ्य के खिलाफ सदर थाना पुलिस ने गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। दर्ज मामले में स्वेच्छा से चोट पहुंचाने, गलत तरीके से रोकने, फिरौती के लिए अपहरण, जबरन वसूली और धमकी जैसी धाराएं शामिल हैं। घटना के सामने आते ही यह मामला जिलेभर में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि आरोपी कोई आम व्यक्ति नहीं बल्कि पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी हैं। पीड़ित की शिकायत और लगाए गए आरोप सदर थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार DSP पर आरोप लगाया है कि बुधवार रात करीब 11 बजे साइबर डीएसपी गिरिराज गर्ग ने अपनी निजी गाड़ियों डस्टर और बलेनो से हिमांशु माहेश्वरी नाम के युवक की स्कूटी को घेर लिया। आरोप है कि डीएसपी के साथ कुछ निजी लोग भी थे। हिमांशु के दोस्त मनीष का कहना है कि उनके साथ मौजूद हिमांशु माहेश्वरी को जबरन गाड़ी में बैठाया गया, उसके साथ मारपीट की गई और उससे 5 लाख रुपए की मांग की गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि घटना के समय डीएसपी नशे की हालत में थे। हिमांशु की तलाश और पुलिस की भागदौड़ मामले की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में अफरा-तफरी मच गई। एसपी के निर्देश पर हिमांशु माहेश्वरी की तलाश शुरू की गई। कुछ समय बाद पुलिस को पता चला कि हिमांशु को साइबर थाने ले जाया गया है। वहां से साइबर थाना प्रभारी ठाकराराम उसे सदर थाने लेकर पहुंचे। इसके बाद हिमांशु के दोस्त मनीष की रिपोर्ट पर सदर थाने में डीएसपी गिरिराज गर्ग और अनिल सनाढ्य के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। डीएसपी का पक्ष और सफाई डीएसपी गिरिराज गर्ग का कहना है कि हिमांशु माहेश्वरी के खिलाफ साइबर थाने में पहले से एक मामला दर्ज है। उनके अनुसार जब उन्होंने थाना प्रभारी से पुलिस गाड़ी भेजने की बात कही तो मना कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपने दोस्त अनिल सनाढ्य की निजी गाड़ी से हिमांशु को पकड़ा और साइबर थाना प्रभारी को सौंप दिया। डीएसपी का आरोप है कि बाद में उन्हीं थाना प्रभारी ने हिमांशु को सदर थाने ले जाकर उनके खिलाफ ही मामला दर्ज करवा दिया। जांच से हटाए जाने के बावजूद सक्रियता पर सवाल इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि एसपी ने काफी पहले ही इस केस की जांच डीएसपी गिरिराज गर्ग से वापस ले ली थी। हिमांशु माहेश्वरी से जुड़े मामले की जांच की जिम्मेदारी साइबर थाना प्रभारी ठाकराराम को दी गई थी। इसके बावजूद डीएसपी गर्ग लगातार इस केस के पीछे लगे रहे। खुद डीएसपी ने भी स्वीकार किया है कि उन्हें इस केस से हटा दिया गया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब उनके पास जांच का अधिकार नहीं था तो उन्होंने निजी तौर पर कार्रवाई क्यों की। नैतिक जिम्मेदारी का तर्क और विभागीय बहस डीएसपी गिरिराज गर्ग का कहना है कि उन्होंने यह कदम अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझकर उठाया, क्योंकि उनके अनुसार कोई भी अधिकारी इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहा था। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाया कि वे अपना कर्तव्य ठीक से नहीं निभा रहे हैं। हालांकि, कानून और प्रक्रिया के जानकारों का कहना है कि बिना अधिकार और सरकारी संसाधनों के बजाय निजी गाड़ियों से इस तरह की कार्रवाई करना नियमों के खिलाफ है।


