भास्कर न्यूज | लुधियाना शहर की पॉश और सुनियोजित रिहायशी कॉलोनियों को कमर्शियल बनाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सराभा नगर, बीआरएस नगर और सग्गू चौक से हंबड़ां रोड तक की सड़कों को कमर्शियल घोषित किए जाने के निगम के फैसलों के खिलाफ अब जनता खुलकर सामने आ गई है। इन इलाकों का विकास लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट (एलआईटी) की टाउन प्लानिंग (टीपी) स्कीम के तहत किया गया था, जिसे बाद में केवल बिल्डिंग कंट्रोल के लिए निगम को सौंपा गया। आरोप है कि नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच ने अपनी सीमाओं से बाहर जाकर मनमाने फैसले लेते हुए रिहायशी सड़कों को कमर्शियल घोषित कर दिया। इस मुद्दे को लेकर पब्लिक एक्शन कमेटी, सामाजिक कार्यकर्ता कुलदीप खैरा, रिटायर्ड कर्नल जीएस गिल, सराभा नगर के निवासियों समेत कई लोगों ने मुख्यमंत्री पंजाब, चीफ सेक्रेटरी, लोकल बॉडीज मंत्री, विभागीय सेक्रेटरी और डायरेक्टर को ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में मांग की गई है कि रिहायशी इलाकों की सड़कों को कमर्शियल घोषित करने के आदेश तुरंत वापस लिए जाएं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार और निगम ने इस पर संज्ञान नहीं लिया, तो अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा। निवासियों के अनुसार लोकल बॉडीज के सेक्रेटरी के स्पष्ट आदेश हैं कि इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की किसी भी स्कीम में बदलाव ट्रस्ट की ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (एनओसी) के बिना नहीं किया जा सकता। जबकि हकीकत यह है कि नगर निगम ने सराभा नगर, बीआरएस नगर और अन्य टीपी स्कीम वाली कॉलोनियों में सड़कों को कमर्शियल घोषित करने से पहले एलआईटी से कोई एनओसी नहीं ली। एलआईटी की योजना के तहत विकसित क्षेत्रों में एलआईटी के बायलॉज ही लागू होते हैं और किसी भी संशोधन के लिए मूल विभाग की अनुमति अनिवार्य है। एलआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि सराभा नगर या बीआरएस नगर समेत किसी भी कॉलोनी में रोड को कमर्शियल घोषित करने से पहले नगर निगम ने ट्रस्ट से कोई एनओसी नहीं ली। वहीं, सराभा नगर में पिछले काफी समय से निवासी व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रिहायशी इलाकों में दुकानें, शोरूम और कमर्शियल इमारतें बनने से ट्रैफिक, पार्किंग, शोर और प्रदूषण की समस्या बढ़ गई है। शांत माहौल खत्म हो रहा है और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। लोगों का यह भी कहना है कि कमर्शियल गतिविधियों की अनुमति देने से पहले निगम ने न तो सार्वजनिक राय ली और न ही प्रभावित निवासियों से कोई परामर्श किया। सराभा नगर के निवासी राहुल वर्मा का कहना है कि नगर निगम के टाउन प्लानिंग विंग ने रिहायशी इलाकों में हो रही कमर्शियल गतिविधियों पर आंखें मूंद ली हैं। लोगों की आवाज को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। निगम ने शांतिपूर्ण माहौल में रहने का उनका अधिकार छीन लिया है। अब मजबूर होकर लोग कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं।


