रांची यूनिवर्सिटी के अंतर्गत बिना मान्यता के ही नर्सिंग कॉलेजों का संचालन करने का मामला सामने आया है। विवि के अंतर्गत कुल 46 नर्सिंग कॉलेज हैं। इनमें ऐसे 41 नर्सिंग कॉलेज संचालित हैं, जिनके लिए प्रबंधन की ओर से मान्यता या एक्सटेंशन का प्रस्ताव विवि मुख्यालय में भेजा गया। 5 नए कॉलेज हैं। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन अब तक मान्यता या एक्सटेंशन देने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं ले सका। नतीजा यह हुआ कि हजारों छात्रों का शैक्षणिक भविष्य अनिश्चितता में फंस गया है। इससे विवि प्रशासन की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे और सुर्खियों में है। स्थिति यह है कि शैक्षणिक सत्र 2024-25 से ही एफिलिएशन या एक्टेंशन की प्रक्रिया बाधित है। जबकि नियमानुसार 2025-26 की मान्यता अब तक मिल जानी चाहिए थी। साथ ही शैक्षणिक सत्र 2026-27 में एडमिशन के लिए एफिलिएशन देने का प्रोसेस शुरू हो जाना चाहिए था। नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए थी। लेकिन जब एफिलिएशन ही नवीकृत नहीं हुआ तो नामांकन कैसे होगा। लेकिन कॉलेजों में पढ़ाई जारी है। मान्यता विस्तार का इंतजार हो रहा है। इसलिए जरूरी है एफिलिएशन नर्सिंग पाठ्यक्रम प्रोफेशनल कोर्स की श्रेणी में आते हैं। ऐसे कोर्स में मान्यता का हर वर्ष वैध होना अनिवार्य है। बिना मान्यता या एक्सटेंशन के छात्रों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता है। न ही परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। यानी यह मामला केवल प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य से सीधा जुड़ा हुआ है। इसलिए समय पर एफिलिएशन प्रदान कर दिया जाना चाहिए। अभी डेढ़ दर्जन कॉलेजों का ही निरीक्षण आरयू प्रशासन द्वारा अभी तक डेढ़ दर्जन कॉलेजों का ही निरीक्षण किया जा सका है। शेष कॉलेज का अवलोकन लंबित है। मेडिकल डीन 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो गए। वर्तमान डीन भी 31 जनवरी को रिटायर हो रहे हैं। इसके बाद विवि प्रशासन ने रिम्स प्रबंधन से तीन वरीय शिक्षकों की लिस्ट मांगी है। मान्यता-एक्सटेंशन का प्रोसेस कॉलेज प्रबंधन यूनिवर्सिटी को मान्यता/एक्सटेंशन का प्रस्ताव देता है {यूनिवर्सिटी एक निरीक्षण टीम गठित करती है {टीम में यूनिवर्सिटी के वरीय अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल होते हैं {टीम कॉलेज में जाकर इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी, हॉस्टल, लैब, अस्पताल टाई-अप रिकॉर्ड और स्टूडेंट स्ट्रेंथ की जांच करती है {निरीक्षण रिपोर्ट एप्लीकेशन कमेटी के समक्ष रखी जाती है {इसके बाद कुलपति की अध्यक्षता में निर्णय लेकर अगले सत्र के लिए एक्सटेंशन दिया जाता है। जेयूटी मामले से सबक लेने की जरूरत झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी (जेयूटी) से धनबाद टेक्निकल इंस्टीट्यूट (डीआईटी) को एफिलिएशन मिलने से पहले ही 120 छात्रों का एडमिशन हो चुका था। जेयूटी ने कहा कि डीआईटी के पास पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, इसलिए सीटें नहीं बढ़ाई जा सकती। मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां से मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच का आदेश दिया गया। ये हैं नर्सिंग कॉलेज


