रांची मेयर सीट पर भाजपा से सबसे अधिक 8 ने की दावेदारी, झामुमो से 3 व कांग्रेस से एक

गैर दलीय आधार पर होने वाले निकाय चुनाव के बावजूद पार्टी स्तर पर हलचल तेज हो गई है। पार्टी स्तर पर चुनाव लड़ने के इच्छुक सदस्य दावेदारी भी प्रस्तुत करने लगे हैं। अब तक भाजपा में सबसे अधिक आठ, झामुमो में तीन एवं कांग्रेस में एक प्रत्याशी ने अपने-अपने दावे पेश किए हैं। राज्य के तीन प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा, कांग्रेस एवं झामुमो के संभावित प्रत्याशियों ने पार्टी स्तर पर अपनी दावेदारी पेश की है। भले ही नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहा है, मगर विभिन्न राजनीतिक दलों में सरगर्मी शुरू हो चुकी है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तरह झामुमो- कांग्रेस या इंडी गठबंधन के दलों के बीच इसमें आपसी सहमति बनेगी या नहीं, यह तय नहीं हुआ है। गठबंधन में शामिल दल भी चुनावी घोषणा होने का इंतजार कर रहे हैं। रांची मेयर सीट इस बार आदिवासी स्त्री-पुरुष के लिए आरक्षित है। पिछले 3 चुनावों में यह सीट आदिवासी महिला के आरक्षित थी। झामुमो से ये तीन दावेदार अंतु तिर्की : एक बार मेयर प्रत्याशी, एक बार खिजरी से झाविमो के विधायक प्रत्याशी रहे, फिर झामुमो में वापसी की, वर्तमान में पार्टी के केंद्रीय सदस्य एवं महानगर संयोजक हैं। वीरू तिर्की : जिला एवं महानगर संयोजक, सुजीत कुजूर : सक्रिय पार्टी कार्यकर्ता। भाजपा: इन प्रत्याशियों ने इसलिए की दावेदारी रांची नगर निगम के मेयर पद की बात करें तो यह राजधानी रांची की सबसे हॉट सीट है। अब तक हुए तीन चुनावों में सबसे पहली महिला मेयर रमा खलखो बनीं। वह बंधु तिर्की की पूर्व की अपनी पार्टी झारखंड जनाधिकार मंच के समर्थन से चुनाव लड़ी थीं। इसके बाद दो बार भाजपा समर्थित आशा लकड़ा मेयर रहीं। अभी वह राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की सदस्य हैं। उनकी ओर से अबतक चुनाव लड़ने को लेकर कोई दावा नहीं किया गया है। क्या कहता है झामुमो और कांग्रेस नेतृत्वसीएम के विदेश से लौटने के बाद होगा निर्णय सीएम के आने के बाद महागठबंधन की बैठक कांग्रेस- रमा खलखो: झारखंड गठन के बाद पहली रमा खलखो मेयर बनी थीं। कांग्रेस की समर्पित कार्यकर्ता एवं वर्तमान में प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष। झामुमो केंद्रीय अध्यक्ष सह सीएम हेमंत सोरेन पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि चाहे वह वार्ड पार्षद हो या मेयर, नगर पालिका अध्यक्ष, पार्टी समर्थित एक ही प्रत्याशी मैदान में होगा। पार्टी स्तर पर हर निकाय के लिए सर्वसम्मति बनाने को लेकर एक-एक कमेटी बनाई गई है। जो सर्वसम्मति बनाकर नामों की सूची केंद्रीय अध्यक्ष को सौपेंगे, जिस पर वे निर्णय लेंगे।

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