गंभीर रोगों से पीड़ित 18 मरीजों को इलाज के लिए दिए जाएंगे पांच से 20 लाख रुपए

झारखंड सरकार ने ‘मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना’ के तहत गंभीर रोगों से पीड़ित 18 मरीजों के इलाज की स्वीकृति प्रदान की है। बुधवार को झारखंड स्टेट आरोग्य सोसायटी के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय समिति की बैठक में गंभीर बीमारी से पीड़ित 18 मरीजों के इलाज के लिए सहायता राशि स्वीकृत की गई। बैठक के बाद छवि रंजन ने बताया कि स्वीकृत लाभार्थियों की सूची में गंभीर रूप से कैंसर, किडनी रोग और रक्त कैंसर से पीड़ित मरीज शामिल हैं। इन रोगियों में अलग-अलग कैंसर से पीड़ित 14 मरीज हैं। 3 मरीज किडनी ट्रांसप्लांट और एक ल्यूकेमिया से ग्रसित हैं। विभाग ने इनके इलाज के लिए 5 लाख से लेकर 20 लाख तक की स्वीकृति दी है। बैठक में निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, अपर कार्यकारी निदेशक सीमा सिंह, महाप्रबंधक प्रवीण चंद्र मिश्रा समेत स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और आंतरिक वित्तीय सलाहकार उपस्थित थे। सरिता देवी कोलन कैंसर (पुनरावर्ती) शाहिना परवीन सर्विक्स कैंसर परेश कुमार शर्मा मेटास्टेटिक एडेनोकार्सिनोमा लक्ष्मी नाथ साहू कैंसर (सीए आरएमटी-दाहिनी ओर) लैलुन खातून फेफड़े का कैंसर उषा शर्मा गॉलब्लैडर का एडेनो-स्क्वैमस कार्सिनोमा जब्साना कैबर्त्ता सर्विक्स कैंसर (रेक्टोवैजाइनल फिस्टुला सहित) मो. हारून रशीद कोलन कैंसर (मेटास्टेटिक) अफसाना खातून मेटास्टेटिक पेट का कैंसर मास्टर दिव्यांशु कुमार मल्टीसिस्टम लैंगरहैंस सेल हिस्टियोसाइटोसिस अजमुल अंसारी मेटास्टेटिक फेफड़े का कैंसर उर्मिला करुआ सर्विक्स कैंसर (स्टेज–IV) सलमा परवीन बाएं स्तन का कैंसर नर्गिस आरा एडेनोकार्सिनोमा (जीई जंक्शन) मंडीप कुमार किडनी ट्रांसप्लांट जीतबहन मछवा किडनी ट्रांसप्लांट आदित्य कुमार किडनी ट्रांसप्लांट मिस राजनंदिनी कुमारी ब्लड कैंसर बैठक में एक ऐसा मामला भी आया, जिसमें मरीज के इलाज का अनुमानित खर्च 16 लाख रुपए है। मामला 10 लाख से अधिक की श्रेणी का होने के कारण समिति ने इस प्रस्ताव को कै​बिनेट की स्वीकृति के लिए भेजने का निर्णय लिया। वहीं, कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने निर्देश दिया कि प्रत्येक मरीज का भौतिक सत्यापन सिविल सर्जन या नामित अधिकारी द्वारा अनिवार्य किया जाए। आवश्यकता पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सत्यापन हो। अस्पताल से मिले ट्रीटमेंट एस्टीमेट का तकनीकी सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए। बिना स्पष्ट मेडिकल स्टेटस वाले प्रस्ताव स्वीकार न किए जाएं। उन्होंने कहा कि योजना में पारदर्शिता और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाना है। इन रोगियों को मिला योजना का लाभ…

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