वीआईपी रोड में अपनी दलदल भरी जमीन को ऊंचा करने के लिए जमीन मालिक द्वारा प्राकृतिक नाले से छेड़छाड़ के मामले में कार्रवाई शून्य है। 11 दिन बीत जाने के बाद भी न तो प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई कार्रवाई की गई और न ही निगम की ओर से। इधर, कार्रवाई के मामले में अब प्रशासन और निगम आमने सामने है। प्रशासन की ओर से तहसीलदार का इस मामले में कहना है कि हमने मौके का सीमांकन कर रिपोर्ट एसडीएम को सौंप दिया है। जबकि निगम प्रशासन का कहना है कि उन्हें अब तक कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। सीमांकन रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। पूरा मामला 28-29 दिसंबर को सामने आया था। निगम के जोन क्रं. 10 वीआईपी रोड पर राजाराम मार्ग के पास नाले को छेड़छाड़ की जानकारी सामने आई। शिकायत के बाद मौके पर पटवारी, आरआई और नायब तहसीलदार पहुंचे और विवादित जगह और नाले की जमीन का सीमांकन किया गया। इसमें करीब डेढ़ एकड़ भूमि पर छेड़छाड़ हुई है। इसमें करीब 1 एकड़ जमीन दीपक चंद्राकर के नाम बताई गई है। वहीं करीब आधा एकड़ भूमि चारागाह है। यह प्राकृतिक नाला निजी जमीन से भी होकर गुजर रहा है, जिसके चलते यह पूरी तरह दलदली हो गया है। अपनी दलदली जमीन को समतल करके कीमत बढ़ाने और प्लाटिंग या बेचकर निकलने के उद्देश्य से किया गया है। यही नहीं जब राजस्व विभाग की टीम और निगम टीम मौके पर सीमांकन के लिए पहुंची तो जमीन मालिक ने ही नाला अपनी जमीन से जाने की बात कहते हुए नाले का सीमांकन करने के लिए आवेदन दे दिया। जल निकासी होगी प्रभावित
भास्कर पड़ताल में पता चला कि इसी दौरान नाले का फ्लो बना रहे इसके लिए बिना किसी अनुमति के दो पाइप को लगाकर मिट्टी बिछा दी। मौके पर दो और पाइप रखा भी मिला, जिसे विवाद के बाद नहीं लगाया जा सका है। भूस्वामी के इस काम से अमलीडीह जैसे बड़े क्षेत्र के निकासी व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इतना ही नहीं जिस जगह पर मिट्टी डालकर समतल किया गया और प्राकृतिक नाले के साथ छेड़छाड़ की गई, वहां बाउंड्रीवाल के साथ एक मकान भी बना हुआ है। यही नहीं नाले में पाइप लगाकर मिट्टी डालने और मकान बनाने के संबंध में निगम से किसी भी प्रकार की अनुमति या नक्शा पास नहीं कराया गया था। जानिए, इस पूरे प्रकरण में इसलिए खड़े हो रहे सवाल अवैध प्लाटिंग का चल रहा जोरों पर खेल: आकाश
इस संबंध में निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि पूरे निगम क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग का काम धड़ल्ले से चल रहा है। यह इसीलिए किया गया है, मैं खुद मामले में मौके पर गया था। बड़े भूभाग को समतल करने का काम किया गया। निजी जमीन भी है तो बिना किसी अनुमति के नाले में पाइप लगाने और दबाने का काम कैसे हो सकता है। वहां पर एक मकान भी बना है, जिसकी भी कोई अनुमति नहीं है। कड़ी कार्रवाई की मांग के बाद भी सीमांकन रिपोर्ट का इंतजार कर अधिकारी लेट-लतीफी कर मामले को दबाने में लगे हैं। अधिकारियों की नाकामी है : जोन अध्यक्ष सचिन
जोन क्रं. 10 क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग और नाले का रुख मोड़ने के मामले में जोन अध्यक्ष सचिन मेघानी ने कहा कि यह पूरी तरह से निगम के अफसरों की नाकामी है। निगम के अनुमति के बिना आम व्यक्ति अपने घर में एक सीढ़ी अतिरिक्त बना ले तो उनपर कार्रवाई हो जाती है। नाले पर पाइप डालकर काम किया गया है और अधिकारियों को जानकारी नहीं यह पूरी तरह से उनकी ही जिम्मेदारी है। प्रारंभिक रिपोर्ट कर दी जमा: नायाब तहसीलदार
इस संबंध में नायब तहसीलदार ज्योति सिंह ने बताया कि विवादित जमीन और नाले की अभी प्रारंभिक सीमांकन रिपोर्ट एसडीएम के पास 9 जनवरी को जमा कर दी है। इसमें निजी जमीन भी थी और कुछ हिस्सा नाले का भी था। जमीन मालिक के आवेदन पर पूरे नाले की सीमांकन जल्द कर रिपोर्ट देंगे। नहीं मिली रिपोर्ट इसलिए कार्रवाई नहीं: जोन कमिश्नर
इस संबंध में जोन क्रं. 10 के कमिश्नर विवेकानंद दुबे ने बताया कि नाला में पाइप लगाने और वहां पर मकान बनाने के संबंध में हमसे कोई भी अनुमति नहीं ली गई थी। किसकी जमीन है यह भी पता नहीं है। इसके सीमांकन और भूस्वामी के संबंध में एसडीएम से जानकारी मांगी गई थी। उनकी जांच रिपोर्ट ही नहीं मिल पाई है इसलिए कार्रवाई रुकी हुई है।


