छत्तीसगढ़ की महतारी वंदन योजना में सत्यापन और ई-केवाईसी के बाद लाभार्थियों की संख्या में कमी आई है। 57 हजार महिलाओं की ई-केवाईसी लंबित है। इसमें से करीब 20 हजार महिलाएं अपने दर्ज पते पर नहीं मिलीं। वहीं, 82 हजार महिलाओं के नाम निधन हो जाने के कारण सूची से हटाए गए हैं। इस तरह से पात्र महिलाओं की संख्या करीब 1 लाख 39 हजार घट गई है। प्रदेश में महतारी वंदन योजना की शुरुआत मार्च 2024 में हुई थी। इसके लिए 70 लाख 27 हजार आवेदन मिले थे। परीक्षण के बाद 70 लाख 9 हजार महिलाएं इस योजना के लिए पात्र पाई गईं और मार्च 2024 में ही इन्हें पहली किस्त जारी की गई। बाद में सत्यापन में अपात्र और मृत लाभार्थियों के नाम हटते गए। अधिकारियों ने बताया कि मृत लाभार्थियों की जानकारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से मिलती है, इसके आधार पर ऑनलाइन डेटा हर महीने अपडेट किया जाता है। इस तरह से लाभार्थियों की संख्या 69 लाख बची थी। इस बीच सरकार ने नवंबर 2025 तक ई-केवीईसी कराना अनिवार्य किया। खाद्य विभाग में 65 लाख 2 हजार महिलाओं ने ई-केवाईसी कराया था। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इन्हें पात्र माना। शेष 4 लाख को नवंबर तक ई-केवाईसी कराना था। इसमें से 3 लाख 43 हजार ने ई-केवाईसी कराया। अब भी 57 हजार महिलाओं की ई-केवाईसी लंबित है। इनमें से 18 से 20 हजार महिलाएं ऐसी हैं, जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बार-बार पहुंचने के बावजूद पते पर नहीं मिलीं। इस मामले में अधिकारियों का कहना है कि डेटा सुधार के बाद पात्र महिलाओं को ही योजना का लाभ दिया जाएगा। योजना में 14, 948 करोड़ रुपए का हो चुका है भुगतान
महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि योजना के तहत मार्च 2024 से जनवरी 2026 तक कुल 14 हजार 948 करोड़ रुपए की राशि सीधे महिलाओं के खातों में भेजी जा चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक ई-केवाईसी अनिवार्य है। इसके बगैर योजना का लाभ नहीं मिलेगा। कई महिला लाभार्थी ऐसी भी थीं जिन्होंने जनवरी में ई-केवाईसी कराया। इन्हें दिसंबर और जनवरी दो माह की किस्त दी गई है। दो लाख से अधिक महिलाओं को मिल रही विधवा पेंशन छत्तीसगढ़ में विधवा पेंशन योजना भी चल रही है। इस योजना के तहत लाभार्थी को प्रतिमाह 500 रुपए दिए जाते हैं। पति की मृत्यु के बाद महिला को बहुत सी परेशानी का सामना करना पड़ता है ऐसी स्थिति में सरकार के द्वारा उन्हें आर्थिक अनुदान की राशि देने की शुरुआत 2018 में की थी। इस योजना से राज्य की विधवा महिलाओं को अपनी छोटी -मोटी जरूरतों के लिए किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। राज्य सरकार की ओर से 2024-25 में संसद की ओर से एक सवाल के जवाब में बताया गया कि 2,03,628 महिलाओं को पेंशन का लाभ मिल रहा है। यह संख्या पिछले कुछ वर्षों में धीरे-धीरे बढ़ी है। इसके अलावा प्रदेश में गरीब परिवार से जुड़ी लड़कियों के लिए मुख्यमंत्री कन्या विवाह, छत्तीसगढ़ महिला कोष ऋण,बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना चल रही है। महतारी वंदन की 60% राशि महिलाएं आय अर्जन में, 30% तक पैसा घरेलू जरूरतों पर खर्च करती हैं महतारी वंदन योजना के प्रभाव का आकलन करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने आईआईएम के सहयोग से एक लाख महिलाओं का सर्वे कराया। सर्वे का उद्देश्य यह जानना था कि योजना के तहत प्रतिमाह मिलने वाले एक हजार रुपए महिलाएं किस तरह खर्च कर रही हैं। अब तक 35 हजार लाभार्थी महिलाओं की रिपोर्ट सामने आ चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार महिलाएं औसतन 10 प्रतिशत राशि स्वास्थ्य एवं देखभाल पर खर्च कर रही हैं। वहीं 25 से 30 प्रतिशत रकम शिक्षा और घरेलू जरूरतों में उपयोग की जा रही है। 60 से 65 प्रतिशत महिलाएं इस राशि को आय अर्जन या लघु व्यवसाय में लगा रही हैं। इसी तरह योजना के कारण 85 प्रतिशत महिलाओं की पारिवारिक और आर्थिक निर्णयों में भूमिका बढ़ी है, जबकि 75 प्रतिशत महिलाएं राशि के उपयोग का फैसला खुद ले रही हैं।


