केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बस्तर दौरे पर हैं। 31 मार्च 2026 तक गृहमंत्री का नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य है। नक्सलवाद के खात्मे के लिए अमित शाह रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए नजर आ रहे हैं। फोर्स के आक्रमण के साथ ही वो अब स्थानीय लोगों, युवाओं, समाज प्रमुखों और जनजातीय समाज के प्रमुखों को भी अपने साथ नक्सलवाद की लड़ाई में एक मंच पर ला रहे हैं। अपने दौरे के दौरान उन्होंने ऐसे कई समूहों से स्थानीय सर्किट हाउस में मुलाकात की और उनकी समस्या सुनी और अपना विजन बताया। अमित शाह की इस नई रणनीति से नक्सलवाद पर तो गहरी चोट पड़ेगी ही साथ ही साथ बस्तर में भाजपा के लिए एक नया प्लेटफॉर्म तैयार होगा। एनकाउंटर में आम आदमी भी नक्सलवाद के खिलाफ सामने आएं, ऐसे प्रयास शुरू शौर्य भवन में जवानों के साथ की बैठक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शौर्य भवन में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों के अफसरों, जवानों से मुलाकात की। सूत्रों की मानें तो यहां शाह ने पिछले छह महीने में नक्सल मोर्चे पर चलाए ऑपरेशन और एनकाउंटर पर अफसरों से चर्चा की। वहीं नक्सलियों के लिए अंतिम विकल्प सिर्फ सरेंडर को रखने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई ऐसा नहीं करता है तो अफसर उससे कड़ाई से निपटें। बैठक के बाद फोर्स और भी ज्यादा आक्रामक अंदाज में जंगलों में उतरेगी। गृहमंत्री ने मांझी-चालकी से जाना हाल बस्तर में मांझी-चालकी रियासतकाल से जनजाति समूह के मुखिया के भूमिका में रहे हैं। स्थानीय सर्किट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम में अमित शाह ने मांझी-चालकियों से मुलाकात की। रात को वे यहीं रुके भी। इस दौरान उनसे खुलकर चर्चा की और मैसेज दिया कि भाजपा सरकार बस्तर को नक्सलमुक्त करने के साथ-साथ आदिवासियों को विकास का नया मॉडल देना चाहती है।


