हाई कोर्ट ने जेलों में बंद कैदियों की शिकायतों के निवारण के लिए राज्य सरकार को एक शिकायत निवारण कमेटी बनाने के लिए कहा है। साथ ही यह भी अंतरिम निर्देश दिया कि वह कैदियों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की नीति लेकर आए और कैदियों की व्यक्तिगत स्वच्छता व स्वास्थ्य के लिए भी पर्याप्त कदम उठाए जाएं। अदालत ने कहा कि यह कल्पना से परे है कि प्रदेश के मौसम को देखते हुए कैदियों को सप्ताह में एक बार ही कपड़े धोने की अनुमति कैसे दी जा सकती है। साल 2022 में नियमों में संशोधन करने के बावजूद जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग हैं। कैदियों को आज भी पीने और कपड़े धोने के लिए पर्याप्त पानी सहित अन्य सुविधा नहीं मिल रही हैं। अदालत ने कहा कि शिकायत निवारण कमेटी में सभी जिलों के मजिस्ट्रेट, जिला न्यायाधीश, सीजेएम, सामाजिक कल्याण अधिकारी, जेल अधीक्षक व डीएलएसए सचिव शामिल हो। वहीं इस समिति के गठन की सूचना हर जेल के नोटिस बोर्ड पर लगाई जाए, ताकि कैदी अपनी शिकायत उन तक पहुंचा सके। मामले में गृह मंत्रालय को भी पक्षकार बनाएं। जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने यह आदेश पीपुल्स वॉच राजस्थान की याचिका पर दिए। जेलों में कैदियों के लिए पर्याप्त पानी व साबुन नहीं मिलने को गंभीर मानते हुए सरकार से पूछा है कि इस पर उनकी क्या पॉलिसी है। डीजे व अन्य जजों को निर्देश; जेलों का औचक निरीक्षण करें याचिका में यह कहा जेल नियम, 1951 में कैदियों के लिए प्रावधान हैं। नियम 114 के अनुसार कैदी सप्ताह में एक बार कपड़े धोएंगे और जेल अधिकारी साबुन मुहैया कराएंगे। नियम 120 के तहत पुरुष कैदी को हर सप्ताह तीन चौथाई औंस और महिला कैदियों को डेढ़ औंस धोने का सोडा प्रदान किया जाएगा। हालांकि साल 2022 में जेल नियमों में संशोधन हुआ है, लेकिन हालात जस के तस हैं। सरकारी अधिवक्ता सुमन शेखावत ने कहा कि नियमों के तहत कैदी को तय मात्रा में सुविधा दी जाती है। अदालती दखल की जरूरत नहीं है।


