स्टेट कैंसर हॉस्पिटल में इलाज कराने आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रोज करीब एक हजार मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, लेकिन मेडिकल ऑन्कोलॉजी के सिर्फ दो डॉक्टर हैं। हालात ऐसे हैं कि गंभीर मरीजों की एबीजी जांच तक अस्पताल में नहीं हो पा रही है और परिजनों को सैंपल लेकर बाहर लैब में भटकना पड़ता है। सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जरूरी जांचों के लिए मरीजों को 14 किलोमीटर दूर एसएमएस अस्पताल भेजा जा रहा है। मरीजों का समय लाइनों में कट रहा, 2 बजे के बाद ब्लड टेस्ट, एक्स-रे बंद
फुलेरा निवासी एक मरीज इलाज के लिए स्टेट कैंसर हॉस्पिटल पहुंचा। ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के लिए पर्ची कटवाई और करीब 70 मरीजों के पीछे लाइन में लग गया। लगभग दो घंटे बाद नंबर आया। इसके बाद आईपीडी रजिस्ट्रेशन और फाइल बनवाने में 15 मिनट लगे। फिर मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना में अप्रूवल और अन्य प्रक्रिया में करीब दो घंटे निकल गए। इसके बाद सीटी स्कैन जैसी जांच के लिए मरीज को एसएमएस अस्पताल जाना पड़ा। अस्पताल में दोपहर दो बजे के बाद ब्लड टेस्ट और एक्स-रे तक नहीं होते। “मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए जल्द नई यूनिट शुरू की जाएगी। पिछले साल इम्युनोथैरेपी जैसी महंगी करीब 60 करोड़ रुपए की दवाइयां मरीजों को मुफ्त उपलब्ध कराई गई हैं। नए डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भी भेजा गया है।”
-डॉ. संदीप जसूजा, अधीक्षक, स्टेट कैंसर हॉस्पिटल 10 मिनट में जांच नहीं तो परिणाम सटीक नहीं होते गंभीर मरीजों की एबीजी (आर्टेरियल ब्लड गैस) जांच होती है। इसमें ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, पीएच की जानकारी मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सैंपल लेने के बाद 5 से 10 मिनट में जांच हो तो परिणाम सटीक होते हैं। स्टेट कैंसर हॉस्पिटल में यह सुविधा फिलहाल उपलब्ध नहीं है। 6 डॉक्टरों के पद स्वीकृत, हैं सिर्फ 2


