एमडीएस यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच विद्यार्थियों से कराने के मामले में अब सख्त कार्रवाई तो की है लेकिन दोषी परीक्षक का नाम उजागर नहीं किया है। इसके पीछे गोपनीयता का हवाला दिया है। सूत्रों के अनुसार यह परीक्षक नागौर क्षेत्र से संबंधित बताया जा रहा है। परीक्षा नियंत्रक डॉ. एसके टेलर के मुताबिक दोषी परीक्षक को आजीवन परीक्षा कार्यों से डिबार (प्रतिबंधित) कर दिया है। परीक्षक सहित वीडियो वायरल करने वाले दोनों विद्यार्थियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए हैं। वहीं, जिस राजकीय कॉलेज के को-ऑर्डिनेटर ने उत्तर पुस्तिकाओं का बंडल दिया था, उन्हें भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्होंने बताया कि कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल के निर्देश के तहत उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। कमेटी की रिपोर्ट में संबंधित परीक्षक के पास से वीडियो की सामग्री की पुष्टि हुई है। दोषी का नाम नहीं बताने के पीछे दिया गोपनीयता का तर्क विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले दोषी परीक्षक का नाम उजागर नहीं करने के पीछे यूनिवर्सिटी प्रशासन का तर्क है कि गोपनीय कार्य में शामिल होने से इसका नाम नहीं बताया जा सकता। उसकी सुरक्षा को भी बड़ा कारण बताया गया है। गौरतलब है कि वीडियो सामने आने के बाद कार्रवाई को लेकर छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किए थे। यह खबर भी पढ़ें….. यूनिवर्सिटी की कॉपियां चेक कर रहे स्टूडेंट:युवती बोली- ऐसी राइटिंग लिखोगे तो नंबर नहीं दूंगी; जानिए- क्या बोले एग्जाम कंट्रोलर


