चंडीगढ़ बीफ बरामद केस में आरोपी को झटका:हाईकोर्ट ने जमानत नहीं दी; कहा- अनजान होने की दलील स्वीकार नहीं

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ में 50 किलो बीफ बरामदगी के मामले में आरोपी नूर मोहम्मद को कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि यह दलील कि आरोपी को मांस के बीफ होने की जानकारी नहीं थी, प्रथम दृष्टया स्वीकार योग्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों का सार्वजनिक व्यवस्था और साम्प्रदायिक सौहार्द पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, इसलिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अग्रिम जमानत एक असाधारण राहत है, जिसे सामान्य रूप से नहीं दिया जा सकता। सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी नूर मोहम्मद की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। एक्टिवा से 50 किलो संदिग्ध मांस बरामद कोर्ट के आदेश के अनुसार, 19 अगस्त 2025 को चंड़ीगढ़ के सेक्टर-34 थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक एक्टिवा सवार व्यक्ति को रोका था। तलाशी के दौरान उसके पास से करीब 50 किलो संदिग्ध मांस बरामद हुआ। पूछताछ के दौरान आरोपी मांस से संबंधित कोई वैध लाइसेंस या दस्तावेज पेश नहीं कर सका, जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। मांस के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए थे। शुरुआती कार्रवाई के बाद आरोपी को जमानत पर रिहा कर दिया गया था। हालांकि, बाद में लैब रिपोर्ट में पुष्टि हो गई कि बरामद मांस बीफ था। इसके बाद पुलिस ने पंजाब प्रोविजन अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए केस में धारा 299 और पंजाब प्रॉहिबिटेशन ऑफ काऊ स्लॉटर एक्ट की धारा 8 जोड़ दी। आखिरी समय पर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी का यह कहना कि उसे मांस के बीफ होने की जानकारी नहीं थी, महज जिम्मेदारी से बचने का आखिरी समय का प्रयास प्रतीत होता है। हाईकोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया यह तर्क विश्वसनीय नहीं है। कोर्ट के आदेश के अनुसार, अधिनियम के तहत आरोपी को नोटिस जारी किया गया, लेकिन उसने अंतरिम जमानत की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया। एडिशनल सेशन जज ने उसकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद आरोपी ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की, लेकिन हाईकोर्ट ने भी उसे खारिज कर दिया। धार्मिक भावनाओं और कानून-व्यवस्था का मामला सरकारी पक्ष और शिकायतकर्ता की ओर से वकील सुशांत गुप्ता और वकील देविंद्र राजपूत ने दलील दी कि गाय हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में पूजनीय है। इस तरह के कृत्य से धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। साथ ही आशंका जताई गई कि आरोपी बीफ की अवैध बिक्री से जुड़े किसी संगठित गिरोह का हिस्सा हो सकता है, जिसकी जांच के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

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