प्रदेश में बेटियों के लिए अलग से क्रिकेट एकेडमियां नहीं होने के बावजूद लड़कों के साथ खेलकर राजस्थान की अंडर-15 टीम में जगह बनाई है। इसके बाद इस सीजन में बेटियों ने अंडर-15 नेशनल का सेमीफाइनल मैच भी खेला। हालांकि इसमें हार का सामना करना पड़ा। खास बात यह है कि टीम में खेली एक भी लड़की ने इससे पहले लड़कियों के किसी टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लिया। क्रिकेट की बैटिंग, बॉलिंग, फील्डिंग, विकेटकीपिंग आदि की जो भी बारीकियां सीखी हैं, लड़कों के साथ ही सीखी हैं। इस बारे में राजस्थान टीम के पूर्व कप्तान रोहित झालानी से बात कि तो उन्होंने कहा, ‘हां, लड़कियों के लिए अलग से एकेडमी तो कम हैं, लेकिन ज्यादातर में लड़कियों के लिए अलग स्लॉट और नेट्स होते हैं। हां, जब मैच सिचुएशन की बात आती है तो एक-एक, दो-दो लड़कियों को हर बॉयज टीम में खिलाते हैं।’ अब थोड़ा अवेयरनेस आया है तो छोटी-छोटी लड़कियां भी एकेडमी आने लगी हैं। ऐसे पहुंचीं मुकाम तक, क्रिकेटर्स से सुनिए उनके सफर की कहानी मैं अपने पापा की एकेडमी में ही प्रैक्टिस करती हूं। वहां ज्यादा लड़कियां नहीं आती तो लड़कों के साथ ही प्रैक्टिस करती हूं। सप्ताह में एक-दो प्रैक्टिस मैच में लड़कों के साथ ही खेलती हूं। जब आरसीए की चैलेंजर वगैरह होती है तभी लड़कियों के साथ मैच खेलने को मिलते हैं। टूर्नामेंट में 2 शतक लगा चुकी हूं। प्रीति कसाना, मिडिल ऑर्डर बैटर (कोटपूतली) मैं पहले जयपुर में अरावली एकेडमी में प्रैक्टिस करती थी। दो साल से दिल्ली में शिखर धवन की एकेडमी में प्रैक्टिस कर रही हूं। हमारे एज ग्रुप में लड़कियों के टूर्नामेंट नहीं होते तो हम लड़कों की टीमों में खेलते हैं। हां, यह जरूर है कि लड़कों के साथ खेलने से ज्यादा कॉन्फिडेंस आता है। रोशेल यादव, ऑलराउंडर (अजमेर) मैं जिस एकेडमी में जाती हूं वहां तो सिर्फ 5-6 लड़कियां ही आती हैं। तो हम अपने एज ग्रुप या उनसे बड़े एज ग्रुप के लड़कों के साथ ही क्रिकेट की बारीकियां सीखते हैं। कोच भी हमें हमेशा लड़कों की तरह स्ट्रॉंग बनाने पर फोकस करते हैं। इससे काफी कॉन्फीडेंस आता है। कप्तान माहिरा (कोटा) लड़कियों के टूर्नामेंट होते ही कहां हैं जो हमें लड़कियों के साथ प्रैक्टिस करने का मौका मिले। लड़कियों की अलग से एकेडमी भी नहीं हैं। लड़कों की एकेडमी में ही जितनी भी लड़कियां आती हैं उन्हें एक स्लॉट लड़कियों को दे दिया जाता है उसी में प्रैक्टिस करती हैं। मैच प्रैक्टिस तो बॉयज टीम में खेल कर ही होती है। एमएनपीएस राजस्थान का एकमात्र क्लब, जो सिर्फ गर्ल्स को ट्रेनिंग देता है
जयपुर की एमएनपीएस एकेडमी राजस्थान की एकमात्र ऐसी एकेडमी है, जो गर्ल्स को ट्रेनिंग देती है। पिछले 14 साल से ये एकेडमी चल रही है। इसकी लगभग 30 से ज्यादा लड़कियों सीनियर से लेकर विभिन्न एज ग्रुप में नेशनल खेल चुकी हैं। इनमें से संगीता, सुमन, सिद्धि तो राजस्थान टीमों की कप्तान भी रह चुकी हैं। इस क्लब की करीब 10 क्रिकेटर एनसीए और जेडसीए तक पहुंची हैं। खास बात यह है कि कोच सुरेन्द्र सिंह भाटी इन्हें निशुल्क कोचिंग देते हैं और सारी लड़कियां गांव-ढाणी की होती हैं।


