राजस्थान हाईकोर्ट में आज उस समय आपातकालीन सेवाओं की पोल खुल गई। जब एक घायल महिला वकील को अस्पताल ले जाने के लिए हाईकोर्ट की एम्बुलेंस में ड्राइवर नहीं मिला। वकीलों ने पूरे ड्राइवर की पड़ताल की तो पता चला कि आज वो हाईकोर्ट पहुंचा ही नहीं। उसके बाद वकील रविन्द्र सिंह शेखावत और वकील सतीश खंडेलवाल स्वयं एम्बुलेंस चलाकर घायल महिला वकील को एसएमएस अस्पताल के ट्रोमा सेंटर लेकर पहुंचे। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया और फिर एम्बुलेंस को लेकर वापस हाईकोर्ट पहुंचे और उसे उसकी जगह पर पार्क किया। लेकिन इस घटना के बाद वकीलों में नाराजगी है, वकीलों का कहना है कि हाईकोर्ट परिसर में आपतकालीन सेवाओं को तुरंत दुरस्त किया जाना चाहिए। वहीं लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। ड्राइवर का फोन भी बंद था
अधिवक्ता सतीश खंडेलवाल ने बताया कि सुबह महिला अधिवक्ता प्रिया प्रकाश अपनी स्कूटी से हाईकोर्ट आ रही थी। हाईकोर्ट के पास उनका एक्सीडेंट हो गया। वो जैसे-तैसे हाईकोर्ट की डिस्पेंसरी पहुंची, लेकिन वहां से चिकित्सकों ने उन्हें ट्रोमा सेंटर रेफर कर दिया। मैं और साथी वकील रविन्द्र सिंह शेखावत उन्हें लेकर एम्बुलेंस के पास पहुंचे। लेकिन एम्बुलेंस लॉक थी, मेडिकल स्टॉफ और ड्राइवर मौके पर नहीं मिले। एम्बुलेंस में लगी एक पर्ची में मेडिकल स्टॉफ का नंबर लिखा था। उस पर फोन करके उसे बुलाया। लेकिन उसने कहा कि एम्बुलेंस का ड्राइवर नहीं है, ड्राइवर को फोन किया तो उसका मोबाइल स्विच ऑफ था। उसके बाद हमने स्वयं एम्बुलेंस चलाकर अस्पताल जाने का निर्णय किया। वकील रविन्द्र सिंह शेखावत ने एम्बुलेंस चलाई और मैने उन्हें इसमें मदद की। उन्होने कहा कि हाईकोर्ट में आपातकालीन सेवाओं की यह स्थिति चिंताजनक हैं। कोर्ट में बड़ी संख्या में वकील और जजेज मौजूद रहते हैं। ऐसे में आपातकालीन सेवाएं दुरस्त होनी चाहिए।


