सप्ताह भर तक चली जद्दोजहद के बाद भाजपा ने अपने 46 मंडल अध्यक्षों में से 44 की घोषणा कर दी है। इनमें से 11 रिपीट हैं। जबकि 33 नए चेहरे हैं। पूर्व में मंडल अध्यक्ष रहे 23 लोगों को हटा दिया गया है। मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति में भाजपा ने सोशल इंजीनियरिंग पर जोर दिया है। ब्राह्मण, यादव और लोधी जाति से सबसे ज्यादा 18 अध्यक्ष बनाए हैं। इसके साथ ही पटेल, कुर्मी, जैन, अहिरवार, आदिवासी, राजपूत, रघुवंशी आदि जातियों से भी अध्यक्ष बनाकर ज्यादा से ज्यादा जातियों को साधने का काम किया गया है। हालांकि इसके बाद भी कई जातियां ऐसी हैं, जिनसे अध्यक्ष या प्रतिनिधि दोनों ही नहीं बन सके हैं। सुरखी और नरयावली ग्रामीण मंडल में पेंच फंसने के कारण इनकी घोषणा होल्ड कर दी गई है। इनकी नियुक्ति अब बाद में ही होगी। पहली बार दो महिला मंडल अध्यक्ष भी बनी हैं। दोनों ही महिलाएं सागर विधानसभा क्षेत्र से हैं। यहां 4 मंडलों में अब महिलाएं आधे पदों पर हो गई हैं। विधायकों की ही चली, उन्हीं के नजदीकी बने अध्यक्ष : जिले की आठों विधानसभाओं में जो मंडल अध्यक्ष बने हैं उनसे साफ है कि भले ही बूथ समिति तक रायशुमारी हुई हो लेकिन जो नाम सामने आए हैं, अधिकांश विधायकों के नजदीकी हैं या फिर ऐसे हैं, जिनसे विधायकों के अच्छे संबंध हैं। ऐसे किसी व्यक्ति को मंडल अध्यक्ष नहीं बनाया गया है जो विधायक का धुर विरोधी हो। इसकी वजह भी यह है कि जिले के जनप्रतिनिधियों के बीच आपस में चल रही खींचतान के बीच संगठन व उनके विधानसभा क्षेत्र के अंदर गुट खड़े न हों। हटाए गए मंडल अध्यक्षों को मंडल प्रतिनिधि बनाया गया है। कुछ वरिष्ठ नेताओं को भी मंडल प्रतिनिधि बनाया गया है। मंडल – अध्यक्ष – प्रतिनिधि


