समाज सुधरे, सब आपसी सामंजस्य से रहें। लोग सदमार्ग से न भटकें। युवा दिशाहीन न हों, इसी उद्देश्य को लेकर शहर का एक परिवार देश के अलग-अलग तीर्थ स्थलों पर कथाएं कराता है। लोगों को अपने खर्च पर वहां ले जाता है और उनके रहने-भोजन का प्रबंध भी करता है। शहर के महर्षि दयानंद वार्ड निवासी पुरुषोत्तम मुन्ना चौबे यह काम वर्ष 2012 से कर रहे हैं। अब तक 7 तीर्थ स्थानों पर कथाएं करा चुके हैं। जिनमें बरमान, चित्रकूट से लेकर नेमिषारण्य, बद्रीनाथ और नेपाल की राजधानी काठमांडू शामिल हैं। सबसे ज्यादा तीन बार बरमान में कथा कराई है। यहां मां नर्मदा के किनारे स्थित सतधारा पर मोनी बाबा आश्रम में कथाएं हुईं। यहीं पर उन्होंने पहली कथा भी कराई थी। अगली कथा वे रामेश्वरम में कराने जा रहे हैं। जिसको लेकर अभी से प्रबंध शुरू कर दिए हैं। चौबे बताते हैं कि बरमान में नर्मदा नदी पर स्नान के दौरान ही संकल्प लिया था कि तीर्थ स्थलों पर कथाएं सुनने लोगों को ले जाएंगे। ऐसे लोग जो अपने सामर्थ्य से 7 या 9 दिन तक रुककर कथा नहीं सुन सकते, उनका प्रबंध किया जाएगा। स्थान के हिसाब से कराई कथा, व्यास एक ही चौबे बताते हैं कि स्थल के हिसाब से कथा तय होती है। बद्रीनाथ में भगवान बद्रीनाथ की महिमा की कथा कराई। काठमांडू में शिवमहापुराण कराया। चित्रकूट में रामकथा हुई तो बरमान, नेमिषारण्य और शुक्रताल में श्रीमद भागवत कथा हुई। शुक्रताल वह स्थल है जहां शुकदेव गोस्वामी ने 5000 वर्ष पहले अभिमन्यु के पुत्र महाराज परीक्षित को श्रीमद भागवत पुराण सुनाया था। हमारी हर कथा के व्यास पं. विपिन बिहारीजी महाराज ही रहते हैं। शहर की कथाओं में देते हैं सूचना, पंजीयन कराते हैं राहुल चौबे बताते हैं कि आगामी कथा जहां होनी है, उसकी सूचना हम शहर में होने वाली कथाओं के माध्यम से ही देते हैं। जिसमें अपील करते हुए बताते हैं कि जो लोग कथा में जाना चाहें, उनके लिए पूरे इंतजाम के साथ हम ले जाएंगे। उन्हें सिर्फ पंजीयन कराना है। पंजीयन का स्थान और अंतिम तारीख भी हम बताते हैं। नेपाल और बद्रीनाथ के लिए कई लोगों ने आना-जाना अपने व्यय पर किया था, पर ठहरने और पूरे 7 से 9 दिन भोजन का इंतजाम हमने किया था।


