इंदौर में दूषित पानी ने चार बेटियों का पिता छीना:आंखों में रह गए आंसू और यादें; 15 दिनों से 2 लोग अब भी वेंटिलेटर पर

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के चलते चार बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया। घर के कमाने वाले मुखिया की तबीयत दूषित पानी के कारण बिगड़ी और कुछ ही दिनों में उन्होंने दम तोड़ दिया। पिता की मौत के बाद परिवार के सामने सवाल है- अब क्या होगा…? हेमंत गायकवाड़ (50) की मंगलवार (20 जनवरी) रात को अस्पताल में मौत हो गई। पहले तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। थोड़ी देर बाद डॉक्टरों ने उन्हें घर ले जाने को कह दिया। ये बात सुनकर परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। कुछ दिनों पहले तक जो हेमंत गायकवाड़ अपने ई-रिक्शा से स्कूली बच्चों को लाते ले जाते थे, वे इस दुनिया को अलविदा कह गए। हालांकि प्रशासन ने उनकी मौत डायरिया से नहीं होने की बात कही है। बता दें, दूषित पानी से अब तक 25 मौतें हो चुकी हैं। वहीं, बॉम्बे हॉस्पिटल में अब भी 2 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। हेमंत और उनके परिवार की दो तस्वीरें देखिए… बरसों का साथ पल भर में छूट गया
हेमंत गायकवाड़ की मौत के बाद बुधवार को भागीरथपुरा स्थित घर से उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। इस दौरान पत्नी कल्पना उर्फ टीना, बड़ी बेटी रिया (22), उससे छोटी जिया (21), खुशबू (15) और सबसे छोटी मनाली (12) का रो-रोकर बुरा हाल रहा। परिवार के लोग उन्हें ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा कि दूषित पानी की वजह से इतने सालों का साथ चंद पलों में छूट जाएगा। पत्नी अपने पति को और बेटियां अपने पिता को आखिरी बार जाते हुए देखते हुए रो रही थीं। 12 साल की मासूम ने दी पिता को मुखाग्नि
अंतिम यात्रा मालवा मिल मुक्तिधाम पहुंची, जहां अंतिम संस्कार की सभी प्रक्रिया हुई। सबसे छोटी बेटी मनाली भी पहली बार मुक्तिधाम पहुंची। उसकी आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। मासूम बच्ची ने कभी सोचा भी नहीं था कि पिता को इस हालत में देखना पड़ेगा। सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद चाचा संजय गायकवाड़ के साथ मिलकर मनाली ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस पल ने वहां मौजूद सभी लोगों को झकझोर कर रख दिया। हर किसी की आंखें नम हो गईं। घर के बाहर ही लगी है पितृ छाया की प्लेट
हेमंत गायकवाड़ के छोटे भाई संजय गायकवाड़ ने बताया कि दो साल पहले ही घर बनाया था। दोनों भाइयों के परिवार यहीं रहते हैं। जब घर बना था तब भाई ने घर के मेन गेट के बाहर पितृ छाया की प्लेट लगवाई थी। पितृ छाया यानी जहां पिता की छाया हो, लेकिन इस घर से और चार बेटियों के सिर से पिता का साया ही हमेशा के लिए उठ गया। संजय ने बताया कि हेमंत की सबसे बड़ी बेटी रिया का कॉलेज पूरा हो गया है। दूसरी बेटी जिया थर्ड ईयर में पढ़ाई कर रही है। तीसरी बेटी खुशबू 11वीं क्लास और सबसे छोटी मनाली 7वीं क्लास में पढ़ाई कर रही है। पत्नी घर से सिलाई का काम करती है। ई-रिक्शा चलाते थे, कमाने वाले वे अकेले थे
उन्होंने बताया कि बड़े भाई हेमंत की तबीयत 15 दिन पहले खराब हुई थी। दूषित पानी के कारण उन्हें दस्त की शिकायत हुई। उन्हें दवा दी, दवा से दस्त तो बंद हो गए, लेकिन उनके पैर में सूजन आ गई। पैर तक नहीं उठ रहा था, उनका पेट भी फूलने लग गया था। इसके बाद अस्पताल में दिखाया, जहां से अरबिंदो अस्पताल में रेफर कर दिया। कई दिनों से उनका इलाज चल रहा था, लेकिन उनकी हालत खराब होती जा रही थी। मंगलवार रात को डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था। घर में कमाने वाले वे अकेले थे, वे ई-रिक्शा चलाते थे और स्कूली बच्चों को लाते-ले जाते थे। अब यही उम्मीद है कि सरकार आर्थिक मदद करे और बच्ची को नौकरी दे दे, ताकि उनका ये घर चल सके। बेटियों को सरकार से मदद की उम्मीद
हेमंत गायकवाड़ की तबीयत बिगड़ी तो उसके पहले तक वे ई-रिक्शे से स्कूली बच्चों को छोड़ने गए। बेटी रिया ने कहा- अगर उन्हें कोई गंभीर बीमारी होती तो वे कैसे यह सब काम कर पाते, क्योंकि हमारे घर में तो वहीं कमाने वाले थे। पिता के जाने के बाद रिया की चिंता भी बढ़ गई है कि घर का खर्च कैसे चलेगा। उसे सरकार से उम्मीद है कि वे उनकी मदद कर दे और कोई नौकरी दिला दे, ताकि उनका घर खर्च चल सके। बहनों की पढ़ाई पूरी हो सके। घर के बाहर धूल खा रहा ई-रिक्शा
हेमंत गायकवाड़ जो ई-रिक्शा चलाते थे वह उनके घर के बाहर ही पिछले कई दिनों से धूल खा रहा है। हालांकि उसे ढंक कर रखा है, लेकिन वक्त के साथ-साथ धूल की परत उस पर चढ़ चुकी है। एकनाथ सूर्यवंशी काफी दिनों से वेंटिलेटर पर हैं
इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल में 2 लोग अभी भी वेंटिलेटर पर हैं। करीब 15 दिन से ज्यादा समय हो गया है। एकनाथ सूर्यवंशी पिछले काफी दिनों से अस्पताल में वेंटिलेटर पर हैं। परिवार को भी समझ नहीं आ रहा है कि दवा का असर हो रहा है या नहीं। बेटे नीलेश ने बताया कि पिता काफी वक्त से वेंटिलेटर पर हैं। पहले पिता अच्छे थे, 29 तारीख को उल्टी-दस्त के कारण उनकी हालत खराब हुई। बिगड़ने पर उन्हें शेल्बी अस्पताल में भर्ती किया। 3 जनवरी की शाम को उन्हें शेल्बी से बॉम्बे हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया। 4 जनवरी से वे यहां वेंटिलेटर पर हैं। नीलेश का कहना है कि उनकी दोनों किडनी फेल हो गईं। लिवर खराब हो गया है। हार्ट और ब्रेन पर भी असर हुआ है। वे वेंटिलेटर पर हैं। उनसे मिलने जाते हैं, लेकिन वे कुछ जवाब नहीं देते। ‘पता नहीं पिताजी का कब ठीक होंगे’
नीलेश ने बताया कि उनके पिताजी जल संसाधन विभाग में 1983 से दैनिक वेतन भोगी के रूप में कार्यरत थे। कई सालों बाद उन्हें स्थायी कर्मचारी किया गया था। उस समय उनका वेतन 18 हजार रुपए था, लेकिन पेंशन सहित अन्य लाभ नहीं मिले। इसी को लेकर हाई कोर्ट में मामला चल रहा है। उनकी मां शकुंतला (63) हार्ट पेशेंट हैं। दो बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। नीलेश खुद ऑटो ड्राइवर है। रोज करीब ढाई सौ रुपए किराए पर रिक्शा चलाता है। पिता की तबीयत 27-28 दिसंबर से खराब हुई थी। 29 दिसंबर से वे अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसे में उसे 24 घंटे अस्पताल में रहना पड़ता है। वह केवल नहाने के लिए घर जाता है। अस्पताल का इलाज भले ही प्रशासन करा रहा है, लेकिन उनकी खुद की कमाई पूरी तरह बंद हो गई है। उनके दो छोटे बच्चे हैं, जो स्कूल जाते हैं। बच्चों की फीस और परिवार के रोजमर्रा के खर्चों को लेकर परेशानी बनी हुई है। अभी यह भी साफ नहीं है कि पिताजी की हालत कब ठीक होगी, क्योंकि वे काफी समय से वेंटिलेटर पर हैं। एकनाथ की तरह ही पार्वती बाई भी अस्पताल में वेंटिलेटर पर हैं, जिनका इलाज चल रहा है। इधर, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि दोनों मरीजों के मल्टी ऑर्गन फेल्यूअर है और पहले की भी बीमारियां हैं। वेंटिलेटर से एक मरीज को घर ले गए परिजन
हीरालाल को उल्टी-दस्त की शिकायत के कारण 29 दिसंबर को शैल्बी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद 4 जनवरी को उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया। पहले उन्हें आईसीयू में रखा गया, फिर वेंटिलेटर पर लिया गया। इस दौरान डॉक्टरों ने बताया कि उनकी किडनी फेल हो चुकी है और कई अन्य समस्याएं भी हैं। कुछ दिनों बाद उन्हें दोबारा आईसीयू में शिफ्ट किया गया। 17 जनवरी को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। फिलहाल उनकी हालत ठीक नहीं है। पेट काफी फूला हुआ है, पेट में नली लगी हुई है और दवाइयां चल रही हैं। परिवार में दो बेटियां हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। बेटा प्रदीप केटरिंग का काम करता है, जबकि पत्नी गंगा (74) एक दुकान पर काम करती थीं। 28 दिसंबर के बाद से दोनों ही उनकी सेवा में लगे हैं और कमाई का कोई जरिया नहीं है। बेटे प्रदीप के बच्चे भी छोटे हैं। फिलहाल परिवार आर्थिक परेशानी से जूझ रहा है। CMHO बोले- गायकवाड़ की मौत डायरिया से नहीं
इधर, हेमंत गायकवाड़ की मौत के मामले में प्रशासन का कहना है कि हेमंत गायकवाड़ की मौत डायरिया से नहीं गंभीर बीमारी के कारण हुई है। भागीरथपुरा क्षेत्र में जलजनित घटना के डाय‍रिया से प्रभावित कोई भी मरीज गंभीर स्थिति में नहीं है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हासानी ने बताया कि उक्त‍ व्यक्ति के मृत्यु के संबंध में वस्तु स्थिति यह है कि 20 जनवरी को हेमंत पिता गोविंद निवासी पुलिस चौकी वाली गली भागीरथपुरा इंदौर की मृत्यु अरविंदो अस्पताल में रात 9.41 बजे हुई। डॉक्टरों ने इनकी मौत की वजह कार्डियो पल्मोनरी अरेस्ट बताई है। हेमंत का कैंसर का भी इलाज चल रहा था। इन हालात में मौत का वास्तविक कारण कैंसर रोग है। वर्तमान में भागीरथपुरा प्रभावित क्षेत्र के सक्रिय मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती होकर इलाजरत है, जहां शुरू में यह डायरिया की शिकायत के साथ भर्ती किए गए थे, लेकिन वर्तमान में वे डायरिया से पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। ये खबर भी पढ़ें…
इंदौर में बदबूदार, झाग और कीड़े वाले पानी की सप्लाई इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला जारी है। अब तक 25 मौत हो चुकी है। अभी 39 मरीज एडमिट हैं, जिनमें से 10 आईसीयू में हैं। इनमें भी तीन वेंटिलेटर पर हैं। लगातार हो रही मौतों को लेकर अभी भी क्षेत्र में दहशत है। पढ़ें पूरी खबर…

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