डायबिटिक रेटिनोपैथी की जांच के लिए जयप्रकाश (जेपी) प्रदेश का पहला जिला चिकित्सालय है, जहां जांच केंद्र की शुरुआत की गई है। यहां पर एआई फंडस कैमरे से फ्री फंडस स्क्रीनिंग की जाएगी। डायबिटिक रेटिनोपैथी पाए जाने पर मरीज को आगे के इलाज के लिए हमीदिया अस्पताल रेफर किया जाएगा। यही नहीं, मरीजों को रेफर करने के साथ जेपी अस्पताल की टीम उनकी इलाज में मदद भी करेगी। इस केंद्र का संचालन अमृता दृष्टि नेत्र स्वास्थ्य कार्यक्रम के सहयोग से किया गया है। गुरुवार को जेपी में नई यूनिट की शुरुआत के दौरान NHM के वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. प्रभाकर तिवारी ने कहा कि डायबिटिक रेटिनोपैथी मधुमेह से जुड़ी एक गंभीर नेत्र बीमारी है। जिसमें हाई ब्लड शुगर के कारण रेटिना (आंख के पिछले हिस्से) की नर्व (रक्त वाहिकाओं) को नुकसान पहुंचाता है। जिससे रिसाव, सूजन, और नई असामान्य रक्त वाहिकाओं का विकास हो सकता है। जो आगे चल कर धुंधलापन या अंधापन का कारण बन सकता है। इसलिए हर डायबिटिक मरीज की यह जांच जरूरी होती है। 40 से अधिक आयु के मरीज की होगी जांच
इस केंद्र को अस्पताल में चल रहे असंचारी रोग क्लिनिक से लिंक किया गया है। 40 साल से अधिक उम्र के लोगों की डायबिटीज और उच्च रक्तचाप की जांच के बाद डायाबीटिक रेटिनोपैथी का परीक्षण नेत्र रोग विशेषज्ञ की सलाह पर किया जाएगा। निजी क्षेत्र में इस जांच पर दो से ढाई हजार रुपए का खर्चा आता है। रोग होने पर आंख में दिखते हैं खून के छींटे
डायबिटिक रेटिनोपैथी डायबिटीज के कारण आंख के परदे पर होने वाली बीमारी है। इसमें आंख के परदे पर हल्के खून के छींटे देखने को मिलते हैं । इस बीमारी में विजन जाने के बाद पुनः नजर को वापस नहीं लाया जा सकता है । बीमारी में प्रारंभ में कोई स्पष्ट लक्षण या दर्द नहीं होता है । इन लक्षणों को ना करें नजरअंदाज
CMHO डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि अक्षर कटे या तिरछे दिखना, बारीक अक्षर पढ़ने में परेशानी होना, रोशनी की कमी महसूस होना या धुंधला दिखाई देना काले धब्बे या काली रेखाएं दिखना इसके लक्षण है। डायबिटीज के रोगियों को नेत्र चिकित्सक की सलाह से इसकी जांच अवश्य करवानी चाहिए । इसका उपचार दवा अथवा लेजर द्वारा किया जा सकता है।


