धार की भोजशाला में मां वाग्देवी के पूजन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। हुजूर विधानसभा से विधायक रामेश्वर शर्मा ने मुसलमानों से “समझदारी” दिखाने की अपील करते हुए विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जहां देवी का मंदिर है, वहां इबादत कैसे स्वीकार हो सकती है। रामेश्वर शर्मा ने कहा कि भारत के सनातनियों की यह मांग पहले भी थी, आज भी है और आगे भी बनी रहेगी कि जहां बागेश्वरी देवी विराजमान हैं, वहां पूजा होने दी जाए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज स्वयं यह मानता है कि जिस मंदिर में भगवान विराजमान हों, वहां उनकी इबादत स्वीकार नहीं होती। ऐसे में मुसलमानों को राजनीति से प्रेरित होने के बजाय समझदारी दिखानी चाहिए और हिंदुओं के साथ सद्भाव रखते हुए भोजशाला में पूजन करने देना चाहिए। राजा भोज से जुड़ा बताया स्थल
विधायक ने कहा कि भोजशाला राजा भोज द्वारा बनाई गई भूमि पर स्थित है और राजा भोज ने यहां मां सरस्वती का मंदिर बनवाया था। मां सरस्वती विद्या की देवी हैं, इसलिए सभी को उनकी आरती और पूजा करने दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अनावश्यक विवाद खड़ा नहीं किया जाना चाहिए। निरंतर पूजा की मांग
रामेश्वर शर्मा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय से वे बार-बार प्रार्थना करेंगे। लोकतंत्र की चौखट पर भी जाएंगे और न्यायालय की चौखट पर भी, ताकि मां जगत जननी देवी सरस्वती की निरंतर पूजा-अर्चना होती रहे।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने बसंत पंचमी के दिन भोजशाला में हिंदू पक्ष को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा और मुस्लिम पक्ष को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज की अनुमति दी है। इसके बाद से ही भोजशाला को लेकर बयानबाजी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ये खबर भी पढ़ें… भोजशाला पर अलाउद्दीन खिलजी के हमले के 700 साल 23 जनवरी को बसंत पंचमी के आयोजन को लेकर धार भोजशाला पर एक बार फिर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इस बार बसंत पंचमी शुक्रवार को है। हिंदू संगठन दिनभर सरस्वती की पूजा की बात कर रहे हैं। वहीं, मुस्लिम समाज भी नमाज पढ़ने आएगा। इससे पहले 2003 से लेकर 2016 के बीच तीन बार ऐसा मौका आया जब बसंत पंचमी शुक्रवार को ही थी। तीनों ही बार विवाद की स्थिति बनी। इस बार ऐसा न हो इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।पूरी खबर पढ़ें


