बेटी ने बताया- क्यों पापा ने परिवार खत्म किया:एटा में बहन के मंगेतर ने 4 लाख मांगे थे; अब उस घर में जाने से भी डर लगता है

‘मेरी छोटी बहन अपने पसंद के लड़के से शादी कर रही थी। हम लोग राजी थे, लेकिन लड़के वाले दहेज में चार लाख रुपए मांग रहे थे। पापा ने हम लोगों की शादी के लिए जो पैसा बचाकर फाइनेंसर को दिया था, वो वापस मांग रहे थे। फाइनेंसर टालमटोल कर रहा था। लड़के वाले 20 जनवरी तक पैसा देने का दबाव बना रहे थे। इसको लेकर घर में झगड़ा हुआ था। पापा तनाव में थे। सोमवार दोपहर को फिर झगड़ा हुआ और पापा ने एक-एक कर मां, बहन, दादी और बाबा को मार दिया।’ ये कहना है कि एटा की 23 साल की लक्ष्मी का। लक्ष्मी के हंसते खेलते परिवार में अब सिर्फ दो लोग बचे हैं। एक लक्ष्मी और और दूसरा उसका पांच साल का भाई देवांश। हत्या के आरोपी पापा जेल में हैं। जिस घर में चार हत्याएं हुईं, लक्ष्मी अब उस घर में जाने से डर रही हैं। लिहाजा वो अपने मासूम भाई के साथ अपनी बुआ के घर चली गई। लक्ष्मी ने हत्याकांड के पीछे की पूरी कहानी बताई, पढ़िए… पहले पूरा मामला समझ लेते हैं… आगे की कहानी लक्ष्मी की जुबानी… लक्ष्मी ने बताया- एटा शहर में गंगा प्रसाद अपने बेटे कमल के साथ मेडिकल स्टोर चलाते थे। पिछले दो साल से वो बेड रेस्ट पर थे। उन्हें कैंसर हो गया था। जिसका इलाज चल रहा था। पूरा परिवार एक साथ रहता था। पिछले साल छोटी बहन ज्योति ने अपने प्यार के बारे में बताया। ज्योति ने एमए के बाद एटा में कोचिंग की। तभी उसका चंडीगढ़ के अनुराग सक्सेना से अफेयर हो गया। अनुराग ठेकेदारी करते हैं। अफेयर के बाद वो नोएडा में तीन साल तक बैंक में जॉब करती रही। पिछले साल अक्टूबर में वो नोएडा से जाॅब छोड़कर घर आ गई थी। उसने हम लोगों को ये बात बताई तो पहले तो पापा नाराज हुए, लेकिन बहन की जिद के आगे मान गए। लव को हम लोगों ने अरेंज मैरिज करने का प्लान बनाया। किसी को शक न हो, इसलिए वे ज्योति को बड़ी बेटी बताने लगे, जबकि वो लक्ष्मी से एक साल छोटी थी। शादी की तारीख 11 फरवरी तय हुई। हम लोग शादी की तैयारियों में लग गए। अचानक लड़के वालों ने मांगे 4 लाख रुपए लक्ष्मी ने बताया– अचानक लड़के वालों ने 4 लाख रुपए की डिमांड कर दी। वो भी 20 जनवरी तक देने को कहा। इस बात से पापा परेशान रहने लगे। उन्होंने कहा कि हम साढ़े तीन लाख ही दे पाएंगे। उन्होंने जितेंद्र नाम के फाइनेंसर के पास रुपए जमा कर रखे थे। वो रकम निकालने के लिए फाइनेंसर के पास गए, लेकिन पैसे देने को लेकर फाइनेंसर टालमटोल करने लगा। घर में इसके अलावा कोई परेशानी नहीं थी। छोटी बहन शादी की तारीख नजदीक देख कई बार पैसों के लिए कह चुकी थी, लेकिन पापा इस बात पर ज्यादा रिएक्ट नहीं करते थे। वो कहते थे- इंतजाम हो जाएगा। फाइनेंसर पैसे देने की तारीख बढ़ा रहा था लक्ष्मी ने बताया– फाइनेंसर जितेंद्र जो ‘मां वैष्णो’ के नाम से फाइनेंस का काम करता है। वो एक एक दिन बढ़ाता जा रहा था, लेकिन पैसे नहीं दे रहा था। चूंकि 20 तारीख को पैसे देना तय था, उससे पहले पैसों का इंतजाम हो नहीं पाया। पापा को ये बात अंदर ही अंदर खाए जा रही थी। वो परेशान हो गए थे। सोमवार की दोपहर को वो मुझे दुकान में बिठाकर बाइक से खाना खाने घर गए थे। वहां फिर से मां और बहन ने पैसों को लेकर बात की होगी, क्योंकि अब सिर्फ एक दिन ही बचा था पैसे देने के लिए। इसी बात पर विवाद हुआ और पापा ने यह खौफनाक कदम उठा लिया। हत्याकांड के बाद पसीने से तर था कमल लक्ष्मी ने बताया – हत्याकांड को अंजाम देने के बाद पापा मेरे पास दुकान पर पहुंचे। उन्होंने पैसे मांगे। उस समय वो पसीने तर-बतर थे। मैंने पूछा कि पापा ठंड में पसीना क्यों आ रहा है तो कोई जवाब नहीं दिया। उनका व्यवहार सामान्य लग रहा था। मुझे उस वक्त बिल्कुल भी अंदाजा नहीं हुआ कि पापा इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देकर आए हैं। पैसे लेने के बाद वह रोज की तरह मार्केट चले गए और फिर उन्होंने फोन नहीं उठाया। मेरे पापा कोई नशा नहीं करते थे। अगर उस समय घर में कोई उन्हें समझाने वाला होता तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती। कमल ऐसा करेंगे, कभी नहीं सोचा था कमल के बहनोई बालिस्टर ने बताया– मैं कमल को 25–30 सालों से जनता हूं। उनका व्यवहार अच्छा था। ये हत्याकांड पैसों के दबाव को लेकर हुआ है। लड़के वालों का दबाव था। लड़की से फोन पर पैसों के लिए कहते थे। लड़की अपनी मां से कहकर दबाव डालती थी। इनका पैसा एक फाइनेंसर के पास था। बार बार कहने पर वो समय से पैसा नहीं दे रहा था। उन्होंने कहा- डिप्रेशन में आकर कमल ने ऐसा खौफनाक कदम उठा लिया, जिसके बारे में हम कभी सोच भी नहीं सकते। हमारी सरकार से मांग है कि बच्चे अनाथ हो चुके हैं। इनकी पढ़ाई लिखाई और जीवन यापन के लिए मदद करे। ——————– ये खबर भी पढ़ें मंत्री दयाशंकर के एआरटीओ ने छुए पैर, देवरिया में विवाद उठा तो बोले- वीडियो AI जनरेटेड देवरिया में यूपी के परिवहन मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री दयाशंकर सिंह के एआरटीओ और डीडीओ ने पैर छुए। एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे मंत्री जैसे ही अपनी गाड़ी से उतरे बुके लेकर खड़े डीडीओ सुशील कुमार सिंह आगे बढ़े। मंत्री को गुलदस्ता देकर पैर छुआ। मंत्री ने आशीर्वाद देते हुए उनके कंधे पर हाथ रखा। पूरी खबर पढ़ें

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *